महराजगंज। जिले में करीब 50 से अधिक शिक्षक बर्खास्त हुए होंगे। इनमें कुछ लोगों ने फाइल में तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर हाई कोर्ट से स्टे ले लिया है। बर्खास्तगी तक इनकी कार्रवाई सिमट कर रह गई है, रिकवरी में विभाग को पसीना छूट रहा है। सूत्र बताते हैं कि विभाग में सेटिंग कर पत्रावली को कमजोर कर दिया जाता है। वहीं रिकवरी करने में विभाग को पसीना को छूट रहा है। कायदे कानून का पेच फंसाकर खामोश हो जाते हैं। प्रक्रिया में उलझी हुई फाइल की ओर कोई देखना नहीं चाहता है।
बीते दिन शिक्षक की हुई बर्खास्तगी से एक बार फिर शिक्षा विभाग सुर्खियों में है। अक्सर फर्जी शिक्षक पकड़ में आते हैं और कार्रवाई की जाती है। प्रक्रिया इतनी जटील होती है कि फाइल को निस्तारित करने में कोई रुचि नहीं लेता है। ये सभी प्रकरण कानूनी दाव पेच में उलझे रहे हैं। सूत्रों की माने तो कार्रवाई होने के बाद विभाग में आरोपी अपनी पैठ का फायदा उठाते हैं। इसमें बचने का तरीका संबंधित बाबू की ओर से ही बताया जाता है। इसके लिए मोलभाव भी होता है। मामला तय होने के बाद फाइल में तथ्यों को कमजोर कर दिया जाता है। कुछ आरोपियों ने इसका फायदा ले लिया है। स्टे लेकर आराम से नौकरी कर रहे हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि एक बाबू की पत्नी भी एक स्कूल में पढ़ा रही हैं। इसकी शिकायत होने पर कार्रवाई हुई तो विधिक जानकारों की मदद से बचाव का तरीका अपनाया। सूत्रों पर यकिन करें तो फाइल में अपने हिसाब से तथ्यों को कमजोर कर दिया गया। इसका लाभ भी उनको मिल गया। जबकि उन्हीं के साथ कार्रवाई की मार झेल रहे अन्य शिक्षकों को कहीं से भी राहत नहीं मिली।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रक्रिया को पूरी करने के बाद ही कार्रवाई होती है। नियम के अनुसार चरणवार कार्रवाई की जा रही है। जांच में मामला सामने आने पर कार्रवाई की जाती है।