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छालों से खेलते हो वफा क्या करोगे तुम...

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‘छालों से खेलते हो वफा क्या करोगे तुम...’
शहर में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। शहर के विस्मिल नगर मोहल्ले में कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदुल्लाह खान के आवास पर देर रात तक कवि सम्मेलन हुआ। स्थानीय कवियों ने अपनी कविता पाठ कर लोगों की वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीजी कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. परशुराम गुप्त ने की। उन्होंने अपनी कविता ‘नए वर्ष पर आओ सपने को सरगम दे’ के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था व राष्ट्रीय परिदृश्य पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ साहित्यकार हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम पांडेय ‘छालों से खेलते हो वफा क्या करोगे तुम, मैं बर्फ से जला हूं दवा क्या करोगे तुम,’ से काव्य प्रेमियों के हृदय को झकझोर दिया। इसी तरह शायर मुमताज अहमद ने ‘हम काम पर जाते हैं’ गजल पढ़ी। कार्यक्रम के आयोजक व संचालन कर रहे अधिवक्ता हमीदुल्लाह खां ने ‘कारगिल के शहीदों की जागीर नहीं देंगे’ सुनाई। दिलीप कुमार शुक्ला व देवेश पाण्डेय ने भी अपनी कविताएं पढ़ी। इस दौरान दौरान कवि सूर्य देव पांडेय, शमशुल हुदा खान, संतोष श्रीवास्तव, डॉ. आलोक भाटिया, कृष्ण मोहन अग्रवाल, अमरेन्द्र शर्मा, हिसामुद्दीन अंसारी सहित अधिकांश काव्य प्रेमियों ने अपनी-अपनी कवितायें पढ़ी। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल रहे। इस मौके पर विमल कुमार पांडेय, अवनीश नारायण त्रिपाठी, शांति शरण मिश्र, अब्दुल कलाम ,आत्माराम गुप्त, डॉ. अहसान अहमद फारूकी, मेहताब खान, हरिकेश बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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