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Maharajganj News: 15 साल पुरानी गाड़ियां बढ़ा रहीं प्रदूषण

Sun, 24 Dec 2023 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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स्कूटी से निकलता धुआं।
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महराजगंज। जिले में छह हजार गाड़ियां अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। वाहन स्वामी नवीनीकरण कराने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। ये गाड़ियां बिना रोकटोक के सड़क पर फर्राटा भर रही हैं। वर्तमान में शहर की एक्यूआई 164 पहुंच गई है। इसे थोड़े से खराब स्तर का माना जाता है। एक्यूआई का यह स्तर दिपावली में हुआ था। एआरटीओ कार्यालय की ओर से ऐसे वाहनों की जांच के लिए जल्द अभियान चलाया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार, 22 दिसंबर 2023 तक 15 साल पुरानी 6815 गाड़ियां चिह्नित की जा चुकी हैं। ये गाड़ियां सड़क पर संचलित हो रहीं हैं, लेकिन इनका नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो लोकोमोटिव निकास में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) जैसे प्रदूषक होते हैं, जो लोगों को जहर देने के लिए फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश करते हैं, साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड भी होते हैं, जो वायु प्रदूषण का एक घातक रूप बनाते हैं जिसे स्मॉग कहा जाता है जो सीधे हृदय, फेफड़े और हृदय रोग और अस्थमा से जुड़ा होता है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम संशोधनों के अनुसार जो वाहन 15 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं उन पर कड़ी पाबंदी लगाने की कवायद चल रही है। क्योंकि ऐसे वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। नए प्रस्ताव के तहत 15 साल पुराने वाहनों की जांच करने और इनका प्रमाणपत्र नवीनीकृत करने का शुल्क भी बढ़ा दिया है।
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फिटनेस टेस्ट से गुजरने के बाद लगेगा शुल्क

15 साल पुराने वाहनों का नवीनीकरण कराने के लिए शुल्क निर्धारित है। कार का दस हजार व बाइक पांच हजार रुपये निर्धारित है। निजी वाहनों को 15 साल बाद फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। यदि यह परीक्षण में सफल हो जाते हैं तो पंजीकरण पांच साल के लिए नवीनीकृत हो जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो वाहन को नष्ट कर दिया जाना चाहिए।



पुरानी कारों को स्क्रैप करने से फायदा

पुरानी कारों को स्क्रैप करने से फायदा होता है। स्क्रैपिंग नीति उन पुरानी कारों को सड़क से हटाने में मदद करती है जो पुराने प्रदूषण मानदंडों का पालन करती है। पुराने वाहनों से अक्सर उच्च उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। स्क्रैपिंग अनिवार्य होने से लोग अधिक बार नए वाहन खरीदेंगे, जिससे ऑटो उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। पुराने वाहनों का स्क्रैप सामग्री इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल का सस्ता विकल्प बन जाता है। पुरानी कारों और बाइक से स्क्रैप धातु का उपयोग करने से एक चक्रीय अर्थव्यवस्था बनाने में मदद और इस्पात उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।


इन वजहों से फैलता है प्रदूषण
सड़कों से उठने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं, औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकले वाला धुआं प्रमुख है। खुले में रखी निर्माण सामग्रियों रेत, बालू भी इसकी बड़ी वजह है।


पीयूसी बनवाने के ये है मानक

यदि वाहन का इंजन बीसए-4 है तो उसके लिए हर छह महीने में पीयूसी बनवाना पड़ता है।

यदि वाहन का इंजन बीसए-6 है तो उसके लिए हर एक साल में पीयूसी बनवाना पड़ता है।
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14 सरकारी गाड़ियाें की उम्र 15 साल से ज्यादा
एआरटीओ कार्यालय की ओर से 15 साल उम्र पूरी करने वाले सरकारी वाहनों को स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र पर ले जाने के लिए पत्र भेजा गया है, दो बार पत्राचार के बाद संबंधित विभागाध्यक्षों ने कोई रूचि नहीं ली। ये पुरानी गाड़ियां कार्यालय परिसर की शोभा बढ़ा रहीं हैं। पुलिस विभाग की दस गाड़ियां, सिंचाई विभाग की एक, बीएसए की एक, ग्रामीण विकास विभाग की एक, नगर पंचायत निचलौल की एक गाड़ी की उम्र 15 साल पूरी हो चुकी है। नियम के अनुसार, 15 साल पुरानी गाड़ियों को स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र भेजना है। वहां से प्रमाण पत्र लाकर एआरटीओ कार्यालय में जमा करना होगा। इसके बाद वाहन का पंजीकरण नंबर निरस्त किया जाएगा। अभी तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है।
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15 साल पुराने वाहनों को विभाग की ओर से नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में सड़क पर वाहन चलते मिले तो कार्रवाई की जाएगी। सरकार वाहनों के संबंधित विभागाध्यक्ष को पत्र भेजने के साथ ही वार्ता की जा रही है।
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-नरेंद्र यादव, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
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