निचलौल (महराजगंज)। तहसील क्षेत्र के केन क्रेशर जहां तेजी से धुआं छोड़ने लगे है। वहीं क्षेत्र की दोनों चीनी मिलों की पेराई सत्र शुरू होने का संकेत अब तक नहीं मिल पा रहा है। नवंबर माह शुरू होने के बाद भी चीनी मिलों के चलने की संकेत नहीं मिल पाने से गन्ना किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। लिहाजा इस बार भी गन्ने की गणित बिगड़ने के आसार अभी से नजर आने लगे हैं। हाल फिलहाल केन क्रेशरों के भरोसे गन्ने की उपज बेचने का विकल्प खुला रहना जहां पर ज्यादातर मजबूर किसानों के लिए राहत की बात है। वहीं अभी तक मिलों की चलने के संकेत नहीं मिल पाने से गन्ना किसानों की बेचैनियां बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि स्थानीय तहसील क्षेत्र के गन्ना बाहुल्य इलाकों के गांव डोमा काटी टोला, डोमा खास, कलनही, बैठवालियां, शितलापुर, बजही, बढ़या आदि गांवों में स्थित दर्जनों क्रेशर पर गन्ने की पेराई होने लगी है। वहीं गुड़ कारखानों पर गन्ना किसान ट्रालियों से गन्ने की आपूर्ति भी कर रहे है। किसानों के लिए दुखद यह है कि केन क्रेशर मालिक क्षेत्र में स्थित दोनो चीनी मिलों को चलने की संकेत न मिलने का फायदा उठा रहे है। पिछले वर्ष जहां केन क्रेशरों के मालिकों द्वारा अंत में तीन सौ रुपये प्रति कुंतल तक गन्ने की खरीद की गई थी। वहीं इस समय केन क्रेशरों पर एक सौ पच्चास रुपये प्रति कुंतल का ही दाम किसानों को गन्ना पहुंचाने पर मिल रहा है, जिस पर जरूरतमंद किसान मजबूरी में अपनी उपज फसल को क्रेशरों तक पहुंचा रहे है। फिर भी उन्हे चीनी मिलों के चलने का इंतजार है। गन्ना उत्पादक किसान रबी फसल की बुआई के लिए अपने खेतों को खाली कर गन्ने को क्रेशरों तक पहुंचा रहे है। ऐसे में उन्हे अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इलाका के अधिकांश किसान इस वर्ष मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य से ही संतुष्ट नहीं है। क्षेत्र के किसान राजू पटेल, सुग्रीव गुप्ता, नन्दकिशोर, अनिल यादव आदि लोगों का कहना है कि चीनी मिल पर बकाया मूल्य को अब तक भुगतान नहीं कराया गया। रकम नहीं मिलने से उन्हें काफी समस्याओं से होकर गुजरना पड़ रहा है। जिला गन्ना विकास अधिकारी ने बताया कि किसान अपनी तत्कालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए क्रेशर पर गन्ना दे रहे है। इसमें अधिकतर किसान सोसाइटी के सदस्य नहीं है, जिले में 25 नवंबर के बाद चीनी मिले चल जाएगी।