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Maharajganj News: 13 हजार महिलाएं पेंशन के लिए लगा रहीं कार्यालय का चक्कर

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महराजगंज। निराश्रित महिलाओं को पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। जिले की 13371 निराश्रित महिलाएं पेंशन के लिए जिला प्रोबेशन कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। वर्तमान में 61,546 निराश्रित पेंशन धारक पंजीकृत हैं, जिसमें से 48,175 लाभार्थियों का आधार सत्यापन पूरा हो चुका है। शेष 13,371 महिलाओं का आधार में कुछ कमी है। इसके कारण सत्यापन अभी लंबित है। सरकार की ओर से गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 1000 रुपये पेंशन दी जाती है। यह राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिये तीन माह में एक बार 3,000 रुपये के रूप में लाभार्थी के खाते में भेजे जाते हैं। साल भर में चार किस्तों में उन्हें 12,000 रुपये मिलते हैं। इन महिलाओं में से कई बार-बार दस्तावेज़ और आधार अपडेट कराने के बाद भी अपने खातों में पेंशन की राशि नहीं जा रही है। उधर जिला समाज कल्याण विभाग की मिले आकड़ों के अनुसार, वृद्धा पेंशन के 1,59,866 पंजीकृत लाभार्थियों में से 1,50,763 को नियमित रूप से पेंशन मिल रही है, लेकिन 9,103 लाभार्थियों का भुगतान आधार से जुड़ी त्रुटियों के कारण अटका हुआ है। फरेंदा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बरगदवा रामसहाय की निराश्रित महिला संगीता ने बताया कि पहले हर तीन महीने में पेंशन आ जाती थी, लेकिन अब बहुत दिनों से नहीं आई। विभाग की ओर से मोबाइल नंबर और बैंक एनपीसीआई लिंक करवाने को कहा गया था। इसी तरह मिठौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सिंदुरिया निवासी लक्ष्मीना देवी बताती हैं कि वृद्धा पेंशन मिलती थी, लेकिन एक साल से खाते में पैसा नहीं आया। चंपा देवी कहती हैं कि पति की मौत के बाद किसी तरह निराश्रित पेंशन बनवाया था। एक साल तक पेंशन आई, लेकिन अब डेढ़ साल से बंद है। राशन, दवा, कपड़े सब कुछ मुश्किल हो गया है। इसी तरह पनियरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गेहुंअना निवासी जमीदुन निशा ने बताया कि पति के निधन के बाद 18 साल पहले आवेदन किया था। कुछ साल तक पेंशन आई, लेकिन चार साल से नहीं आ रही। हर बार कहा जाता है कि इस बार आएगी, पर नहीं आती है। सूचितपुर निवासी तारा देवी का भी यही दर्द है। उन्होंने कहा कि पति के निधन के 15 साल बाद पेंशन शुरू हुई थी, पर अब तीन साल से बंद है।
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