संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। भावना से ही भगवान के दर्शन होते हैं, यह बात शिव महापुराण के दूसरे दिन कथा वाचक धनवंतरीदास ने कही। उन्होंने कहा कि कण-कण में भगवान विराजमान हैं, लेकिन वह उन्हीं को दिखाई देते हैं, जिनका भाव भगवान के प्रति होता है। धनुषधारी मंदिर में राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा को देखते हुए सात दिवसीय शिवार्चन व शिव पुराण का आयोजन किया जा रहा है।
सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक शिवार्चन कार्यक्रम जगदीश पाठक ने पूर्ण कराया। इसके बाद कथा प्रारंभ हुई। दूसरे दिन संत नामदेव की कथा वर्णन किया गया, बताया गया कि जब संत नामदेव की रोटी एक कुत्ता लेकर भागा तो वह उसके पीछे यह कहते हुए भागे कि भगवान आप बिना घी रोटी कैसे खाओगे, उसमें घी तो लगा देने दो। जब वह थककर बैठ गए, तो भगवान ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर दर्शन दिए।
धनवंतरीदास महाराज ने कहा कि हमें हर जीव में ईश्वर का स्वरूप देखना चाहिए, तभी ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। मुख्य यजमान संजय लौंगरैया, विनोद खैरा, सुदामा प्रसाद नौगरैया, सीएल गुप्ता, बृजकिशोर नौगरैया, प्रभुदयाल सुहाने, ओमप्रकाश लोहिया, अरविंद्र नौगरैया, नीरज खैरा, मनोज बिलैया, गहोई सेवा समिति के अध्यक्ष शरद खैरा, मंत्री कैलाश बारसैंया, प्रबंधक अशोक कुरेले, उप प्रबंधक राजीव सेठ के साथ सदस्य दीपक सुहाने, प्रताप नारायण सुहाने, संजीव लोहिया, विशाल मलैया, अमित पिपसानिया, जयप्रकाश कुरेले, वैभव कुरेले, गहोई महिला मंडल की ओर से अध्यक्ष सुमाली खैरा, अंजुला खैरा, जया गुप्ता, राखी, संगीता नौगरैया, कल्पना खैरा, रश्मि कुरेले, संध्या खैरा आदि उपस्थित रहे।