ललितपुर। स्कूल संचालकों, शिक्षकों व किताब दुकानदार की मिलीभगत के चलते जनपद में यूपी बोर्ड की सस्ती किताबें नहीं मिल पा रही हैं। विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पुराने सत्र की मंहगी किताबों से पढ़ने का मजबूर हो रहे हैं।
यूपी बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2022-23 में कक्षा नौ से बारह तक के पाठ्यक्रम में इस बार बदलाव किया और छात्र-छात्राओं के हित को ध्यान में रखते हुए सस्ती किताबों की रेट लिस्ट सूची सार्वजनिक कर दी थी। इतना ही नहीं सस्ती पुस्तकें की सप्लाई करने के लिए अधिकृत किए गए मुद्रकों व वितरकों के नाम की सूची भी सार्वजनिक की गई थी। लेकिन विद्यालय संचालकों, शिक्षकों व किताब दुकानदारों की मिलीभगत के चलते जनपद के छात्रों को यूपी बोर्ड की सस्ती किताबें नहीं मिल पा रही हैं। जिस कारण छात्र-छात्राएं पुराने सत्र की मंहगी किताबों को खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
वहीं नया सत्र शुरू हुए करीब साढे़ तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन जनपद के कक्षा नौ से बारहवीं तक के हजारों छात्र-छात्राएं सस्ती किताबें खरीदने के लिए एक से दूसरी दुकानों पर प्रतिदिन भटक रहे हैं।
बोर्ड की पहल का लाभ नहीं मिल पा रहा
शिक्षा पाने के लिए सबसे ज्यादा खर्च किताबों पर होता है। क्योंकि बाजार में कक्षा नौ से लेकर बारह तक की किताबों की कीमत सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये या इससे अधिक की होती है। मंहगी किताबों से छुटकारा दिलाने के लिए शैक्षिक सत्र 2022-23 में यूपी बोर्ड ने कक्षा नौ से बारह तक की किताबों के बहुत ही सस्ते रेट तय कर दिए। लेकिन बोर्ड की सस्ती किताबों वाली पहल का लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है।
डीआईओएस ने तीन विद्यालयों का निरीक्षण कर जाना शिक्षा का स्तर
ललितपुर। जिला विद्यालय निरीक्षक शेरसिंह वरुण ने सोमवार को महरौनी क्षेत्र स्थित ठाकुर रघुवीर सिंह इंटर कॉलेज सजनाम तिराहा, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज महरौनी, सीबी गुप्ता इंटर कॉलेज महरौनी का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने पढ़ाई जा रही किताबों व कोर्स के बारे में जानकारी की और विद्यालय के छात्र-छात्राओं से बातचीत कर शिक्षा का स्तर जाना। इसके साथ विद्यालयों में तैनात शिक्षकों व प्रबंधन को यूपी बोर्ड द्वारा तय की गईं सस्ती किताबों से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई करवाने को निर्देशित किया और पुराने सत्र की किताबों से पढ़ाते हुए पाए जाने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
बोर्ड द्वारा सस्ती किताबों की सप्लाई के लिए अधिकृत किए मुद्रकों व वितरकों के साथ बातचीत की जा रही है। साथ में उनसे राजकीय विद्यालयों में स्टॉल लगाने की योजना बनाई जा रही है। जल्द ही छात्र-छात्राओं को बोर्ड द्वारा सस्ती किताबें बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी।-शेरसिंह वरुण, जिला विद्यालय निरीक्षक