संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कुछ ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने मुश्किलों का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और लगन से इन महिलाओं ने आज अपनी अलग पहचान बनाई है। जिसमें एक नाम है शारदा का, उन्होंने अपने गांव से निकली नदी पर बोरियों का बांध बनाया और पानी को रोका। शारदा के इस काम के लिए उन्हें लखनऊ में सम्मानित किया जा चुका है। वहीं बिजरौठा की राजकुमारी और नेहा ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा के तहत महिला मेट के रूप में अच्छा काम कर रही हैं। उधर, दैलवारा में तीन बच्चों को डूबने से बचाते हुए अपनी जान देने वाली 14 वर्ष की किशोरी यहां के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है।
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शारदा ने नदी पर बोरियों का बांध बनाकर लोगों को दी प्रेरणा
ब्लॉक तालबेहट के विजयपुरा क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण यहां के लोग परेशान थे। गांव की शारदा वंशकार ने करीब 30-40 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा और तीन से चार तालाबों में स्वयं काम करके जल संरक्षण किया। इसके साथ गांव के बाहर निकली बरुआ नदी पर करीब पांच हजार प्लास्टिक की खाली बोरियों में बालू भरकर बोरियों का एक बांध बना दिया। इससे नदी का पानी रुक गया और करीब एक हजार किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा।
शारदा देवी के इस प्रयास के लिए वर्ष 2023 में उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छ जल शक्ति सम्मान से सम्मानित किया। शारदा देवी के इस काम को अन्य लोगों के लिए प्रेरणा मानते हुए सरकार की एक टीम ने सक्सेस स्टोरी बनाई थी। इस प्रकार से गरीब परिवार की महिला शारदा देवी लोगों के बीच प्रेरणास्रोत बनीं।
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महिला मेट बनकर राजकुमारी बनीं स्वावलंबी
तालबेहट के ग्राम बिजरौठा निवासी राजकुमारी गायत्री माता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। वर्ष 2021 में मनरेगा के तहत गांव में होने वाले विकास कार्य को कराने के लिए महिला मेट के रूप में काम करने लगीं। राजकुमारी ने जल्द ही अपने काम को समझ लिया। उनकी माली हालत सुधरी तो पति को एक वेल्डिंग की दुकान खुलवा दी। कच्चे घर का सुधार और खेतों में सिंचाई के लिए बोरवेल करवा दिया। राजकुमारी की आर्थिक स्थिति सुधरता देख गांव की अन्य महिलाएं भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और उन्हें मनरेगा में महिला मेट के रूप में काम करने को प्रेरणा मिली।
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समूह से जुड़कर माली हालत सुधारी, अब दूसरी महिलाओं के लिए भी बनीं प्रेरणा
तालबेहट के ग्राम पंचायत कड़ेसरा निवासी नेहा अहिरवार वैष्णो देवी स्वयं सहायता समूह से वर्ष 2017 में जुड़ीं और 2021 में मनरेगा में महिला मेट के रूप में काम करने लगीं। ईमानदारी और मेहनत के बल पर नेहा ने अपने घर की माली हालत सुधार ली। बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। घर में गृहस्थी का सामान भी जोड़ लिया। वर्तमान में नेहा की आर्थिक स्थिति सुधर चुकी है और वह अपने गांव सहित जिले के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के बीच प्रेरणा बनी हैं।
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मंजेश ने अपनी जान देकर तीन बच्चों को डूबने से बचाया था
दैलवारा की 14 वर्षीय मंजेश ने जुलाई 2023 को गांव स्थित नगर पालिका के कचरा घर में बने खदान में नहा रहे तीन बच्चों को डूबने से बचाने के लिए अपनी जान दे दी। तीन बच्चों को बचाते हुए अपनी जान देने वाली मंजेश की इस बहादुरी को आज भी लोग याद करते हैं और बहादुरी की बात सामने आने पर मंजेश का नाम लेकर उदाहरण देते हैं।
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आदिवासी सहरिया बच्चों में पढ़ाई की जगा रहीं अलख
शिक्षिका नेहा जैन अजीज ने साहित्य क्षेत्र में कई किताबें लिखकर जनपद का नाम रोशन किया है। उन्होंने आदिवासी सहरिया समाज के लिए चौपाल लगाकर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सफाई, बाल सुरक्षा के लिए जागरूक किया। आदिवासी बच्चों को अलग से पढ़ाकर उनमें पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा कर रही हैं। कला के क्षेत्र में मधुबनी पेंटिंग, गोंड आर्ट, सोहराय पेंटिंग, कोरोना की थीम पर मधुबनी चित्रकारी जिसकी तस्वीर कोरोना पर आधारित संकलन में प्रकाशित हुई है, बाढ़ आधारित मिथिला पेंटिंग के लिए बिहार में मिथिला लोक कला कृष्ण कश्यप सम्मान मिला।
उनके दो शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं, जिनमें किन्नर विमर्श और आदिवासी विमर्श शामिल है। शिल्प के क्षेत्र में भी उनका कार्य सराहनीय रहा। वह बाल नाटकों के माध्यम से शिक्षा, सफाई नशा मुक्ति, मतदान, बालिका शिक्षा का महत्व आदि की जानकारी सहरिया बस्ती के बच्चों को दे रही हैं। नेशनल आइकॉन अवार्ड 2021 सहित उन्हें करीब एक दर्जन से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं।