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Lalitpur News: जीवन जीने की कला सिखाती है रामचरित मानस

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तालबेहट। बुंदेलखंड सरस साहित्य संगम के तत्वावधान में युग-प्रवर्तक महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई गई। इस मौके पर वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण कर हुआ। वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह ऐसे आध्यात्म थे जिसका विश्लेषण युगों-युगों तक मानव जाति करती रहेगी। उनके द्वारा लिखित काव्य रामचरित मानव जीवन जीने की कला सिखाती है। इस मौके पर डॉ. उदय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री, डॉ. ओमप्रकाश रिछारिया, डॉ. सुनील तिवारी, डॉ. बाबूलाल द्विवेदी आदि प्रमुख रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामबाबू त्रिपाठी ने और संचालन विनोद अवस्थी ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार ओमप्रकाश अड़जरिया, रामेश्वर दयाल बबेले, रामेश्वर प्रसाद शुक्ला व रामसिंह बुंदेला को संस्था की ओर से शाल श्रीफल व सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया। संवाद
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