महरौनी। मुनि सुधा सागर महाराज ने कहा कि चक्रवर्ती का सुख भी सीमित है। परंतु वीतरागी प्रभु तो तीनलोक के नाथ हैं। त्रिलोकी प्रभु की महिमा का तो गुणगान जितना करो उतना कम है। वह सोमवार को धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनि श्री ने कहा कि एक फूल मिलने पर अपने जीवन को सीमित मत कर लेना, क्योंकि एक फूल के चक्कर में जीवन की ऊंचाइयों के गुलदस्ते छूट जाएंगे। मुनि श्री ने गुरु मंत्र दिया कि जितना छोड़ते जाओगे, उतना अधिक ऊंचे उठते जाओगे। इसलिए आगे बढ़ने में लाभ ही है।
मुनिश्री सुधा सागर महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर महाराज का मंगल सानिध्य नगर को मिला और मुनि संघ के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समोशरण विधान यशोदय तीर्थ पर हुआ।
मुनिश्री की प्रेरणा से श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर का पुननिर्माण की आधारशिला रखी गई। सभी धार्मिक क्रियाएं ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश द्वारा संपन्न कराई। मंदिर के शिलान्यास का सौभाग्य अजित खंजाची सहित 16 वेदी पुण्यार्जक परिवारों को प्राप्त हुआ। दोपहर में मुनि पुंगव सुधासागर महाराज का मंगल विहार टीकमगढ़ की ओर हुआ। भक्तजनों ने नम आंखों से मुनिसंघ को मंगल विदाई दी। निर्वतमान नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह, बड़ोनिया एजूकेशन के डायरेक्टर दुष्यंत बड़ौनिया, टीकमगढ़ जैन समाज के राजेंद्र चौधरी राजा कारी, ललितपुर से डॉ. राजीव जैन, अशोक शाह ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।