संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो रही है। इसका अंजाम तलाक तक पहुंच रहा है। इस वक्त कुटुंब न्यायालय में 2200 मुकदमे चल रहे हैं। इनमें तलाक के 220 मामले हैं। इसके अलावा भरण पोषण, बच्चे की कस्टडी और दंपती के बीच होने वाले संपत्ति के विवाद से भी जुड़े मुकदमों की भी सुनवाई चल रही है।
केस - एक
लिपस्टिक और नेल पॉलिश न दिलाने पर तलाक की नौबत
बानपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का तीन वर्ष पुराना मामला है। सास अपनी बहू को तेल, साबुन, शैंपू गिनकर देती थी। इस बात को लेकर बहू गुस्से में रहती थी। फिर एक बार दंपती गांव के मेले में गए। यहां पत्नी ने पति से लिपस्टिक और नेल पॉलिश दिलाने के लिए कहा। लेकिन, पति ने नहीं खरीदा। बस इसी बात पर दोनों में लड़ाई शुरू हो गई। कई बार समझौते की कोशिश के बाद भी सुलह नहीं हो पाई और तलाक की नौबत आ गई।
केस - दो
पत्नी का रील बनाना गुजरा नागवार
एक मामला थाना मड़ावरा क्षेत्र का है। यह करीब दो वर्ष से चल रहा है। पत्नी का रील बनाना पति को अच्छा नहीं लगता था। यह मामला घरेलू हिंसा, दहेज और भरण पोषण से शुरू होकर तलाक का रूप ले चुका है।
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पति-पत्नी के रिश्तों में खटास बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों पर शुरू हुई तकरार कोर्ट तक पहुंच जा रही है। मोबाइल का दुरुपयोग, मायके का दखल भी टकराव का कारण बन रहा है। अन्य कारणों में बेमेल विवाह, शराबखोरी, जुआ, सम्मान एवं विश्वास की कमी हैं। हालांकि इन मुद्दों को बैठकर सुलझाया जा सकता है।
- डॉ संजीव कुमार शर्मा, प्रभारी मनोविज्ञान विभाग, नेहरू महाविद्यालय
संबंधों का निभाना बन गया चुनौती
विवाह साझा उत्तरदायित्व है। इसके लिए किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। हालांकि कुछ दशकों में संबंधों का निभाना चुनौती बन गया है। सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में बदलाव इसके कारण हैं।
- पुष्पेंद्र सिंह चौहान, पैनल अधिवक्ता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
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