उधर, पुलिस ने प्रताड़ना के आरोपों को नकारते हुए बताया कि कुछ माह पूर्व आरती के पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद आरती स्वयं घर वापस लौट आई थी। इसके बाद पिता अनंतराम ने कोर्ट के आदेश पर 22 सितंबर को मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरती का मेडिकल कराया और 161 के बयान दर्ज कराए। जिसमें आरती ने बताया था कि वह अपनी मर्जी से मामा के घर गई थी। परिवार वाले आरती पर विरोधियों के खिलाफ न्यायालय में होने वाले 164 के बयान देने का दबाब बना रहे थे। इससे क्षुब्ध होकर युवती ने शनिवार की सुबह कुऐ में कूदकर जान दे दी।
आक्रोशित परिजनों ने दरोगा को दौड़ाया
ललितपुर। कुएं में आरती का शव मिलने की सूचना मिलने पर हल्का में तैनात दरोगा मौके पर पहुंच गया। यहां दरोगा को देखकर मृतका के परिजनों ने आपा खो दिया और वह दरोगा पर आरोप लगाने लगे। हालात बिगड़ते देख दरोगा वहां से जाने लगा तो आक्रोशित परिजनों व गांव वालों ने दरोगा पीछे से दौड़ लगाने लगे। यह देखकर दरोगा ने भी दौड़ लगा दी और मौके से भाग निकले।
20 जून को हुई शादी, 31 अगस्त को घर से हुई थी लापता
ललितपुर। मृतका आरती के पिता ने बताया कि आरती की शादी उन्होंने 20 जून को किशन सहरिया निवासी ग्राम पारौन थाना बार के साथ की थी। इसके बाद 31 अगस्त को आरती घर से लापता हो गई थी। 15 दिन बाद आरती पुलिस के माध्यम से घर आ गई थी।
प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि 164 के बयान में युवती पर परिजनों द्वारा यह दबाव बनाया जा रहा था कि वह विपक्षियों के खिलाफ बयान दे। पुलिस पर लगाए जा रहे प्रताड़ना के आरोप पूूर्णतया निराधार है। अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। -गोपाल कृष्ण चौधरी, पुलिस अधीक्षक