ललितपुर। विकास खंड मड़ावरा के रमगढा में जिलाधिकारी ने सचिव को निलंबित व प्रधान के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की थी। आरोप है कि कार्रवाई के बाद सचिव व प्रधान भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिटाने में जुट गए हैं। सचिव के स्पष्टीकरण देने के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को शिकायतकर्ता डीएम व सीडीओ के समक्ष उपस्थित हुए और सचिव द्वारा शपथ पत्र को झूठा ठहराया। इस प्रकरण से सचिव की मुश्किलें और बढ़ गई है।
विकास खंड मड़ावरा के ग्राम पंचायत रमगढ में मनरेगा के तहत बंधी निर्माण और तालाब खुदाई में हुए भ्रष्टाचार की जांच के बाद ग्राम पंचायत सचिव कमलेश रिछारिया को निलंबित कर दिया था। जबकि प्रधान तुलसीराम के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए थे। जिलाधिकारी की कार्रवाई के बाद अब पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिटाने में जुट गए है। जिसके तहत पंचायत सचिव ने एक स्पष्टीकरण मुख्य विकास अधिकारी को भेजा था। जिसमें शिकायतकर्ता सोमेश और जालम के खेत में काम करवाए जाने का दावा करते हुए अपने आप को निर्दोष बताया गया था। इतना ही नहीं सोमेश का एक शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया था। सचिव के स्पष्टीकरण के बाद बृहस्पतिवार को इस मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब सोमेश और जालम डीएम व सीडीओ के सामने उपस्थित हुए और प्रधान व सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्रों को झूठा ठहराया। शपथ पत्र के माध्यम से सोमेश व जालम ने प्रधान व सचिव के विरुद्घ कार्रवाई की मांग की है।
कार्रवाई के बाद खुदाई कराने का दावा
ब्लॉक रमगढा निवासी सोमेश पुत्र हीरालाल व जालम पुत्र सुंदरा ने डीएम को दिए शपथ पत्र में बताया कि जब 10 अक्तूबर को डीएम ने प्रधान व सचिव पर कार्रवाई की। तभी से प्रधान व सचिव उन पर खेत पर तालाब खुदाई करवाने व बंधी खुदाई करवाने का दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं सोमेश ने यह भी बताया कि 4 अक्तूबर की सुबह करीब 5 बजे ग्राम प्रधान ने गांव में जेसीबी मशीन चलवाई। लेकिन जहां पर मशीन से खुदाई हुई है वह उनके खेत नहीं है। प्रधान ने किसी अन्य जगह पर खुदाई करवाई है। शपथ पत्र में उक्त खुदाई के जेसीबी मशीन के सबूत भी उनके पास होने का दावा किया है।
ग्राम पंचायत सचिव ने सीडीओ को दिया स्पष्टीकरण
ग्राम रमगढा में मनरेगा कार्य में धांधली करने के मामले में निलंबित किए गए ग्राम पंचायत सचिव कमलेश रिछारिया ने मुख्य विकास अधिकारी को अपना स्पष्टीकरण भेजा। जिसमें कमलेश ने ग्राम पंचायतों में नियमानुसार निविदा प्रणाली अपनाने की बात कही। साथ ही निविदा बिक्री रजिस्टर बने होने और जांचकर्ताओं के द्वारा इन्हें मांगे न जाने का आरोप लगाया। स्पष्टीकरण में जालम के खेत पर मेंड़ बंदी को लेकर बताया कि यह कार्य जुलाई 2021 में हुआ था। तब वह इस ग्राम पंचायत में नियुक्त नहीं था। सोमेश के खेत पर खेत तालाब निर्माण को लेकर बताया कि तालाब का निर्माण सोमेश के कहने पर ही कराया गया है। जिसकी पुष्टि सोमेश के द्वारा की गई थी। यह कार्य मौके पर है और सोमेश ने इसको लेकर फोटो सहित शपथ पत्र दिया है। इसके साथ यह भी बताया गया कि उसकी तैनाती ग्राम खुटगुवां में 22 मई 2022 को और ग्राम पंचायत रमगढा में 6 अक्तूबर 2021 को हुई थी।