किसानों के जोरदार प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी ने प्रदेेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न केवल किसानों के मुआवजा की धनराशि मांगी है, बल्कि फसल बीमा की आवश्यक कार्रवाई के लिए कपंनी एचडीएफसी एग्रो को निर्देश जारी किए हैं। इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है।जिले के किसानों को एक के बाद एक आपदा झेलनी पड़ रही है। इसके बाद भी उन्हें शासन- प्रशासन से राहत नहीं मिल पा रही है। बीते माहों में रबी फसल ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण बरबाद हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने किसानों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नुकसान का आंकलन कराया, जिसमें कुल 365 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान का आकलन किया गया। इसके सापेक्ष शासन से 96.70 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त हुई। इस राशि से जिले के 309 ग्रामों के 93,414 लघु, सीमांत एवं वृहद किसानों को ही राहत मिल पाई। अवशेष किसानों ने राहत के अभाव में धरना- प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया। गत दिवस किसानों का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीएम जुहेर बिन सगीर की गाड़ी रोक ली थी। यही नहीं, महरौनी एसडीएम यशु रुस्तगी के वाहन पर खराब उड़द की फसल को फेंक दिया था। इसके अतिरिक्त एक किसान ने हाथ की नस की काट ली थी। शनिवार को जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने प्रदेेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जिले के किसानों की स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि जिले में बड़े औद्योगिक धंधे नहीं हैं। जनपद की खरीफ फसल वर्षा पर आधारित है। वर्तमान में औसत से कम लगभग पचास प्रतिशत बरसात हुई है। इसे ध्यान में रखकर अवशेष धनराशि का आवंटन किया जाए, जिससे किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।