संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सदनशाह की मजार पर उर्स के मौके पर आयोजित मेले में विभिन्न प्रकार के झूले लगाए गए हैं। इन झूलों का संचालन मानकों को ताक पर रख किया जा रहा है। जिला प्रशासन की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है। हालांकि रिपोर्ट अभी गुप्त रखी गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच में बहुत खामियां पाई गई हैं।
जिला प्रशासन ने आपदा के इंतजामों को लेकर उर्स मेले में विभिन्न बिंदुओं पर जांच कराई। सूत्रों के अनुसार जो झूले संचालित किए जा रहे हैं, उनके पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। झूलों का फिटनेस प्रमाणपत्र भी नहीं है। आग लगने की स्थिति में वहां न तो बालू का ढेर है न अग्निशमन यंत्र। पानी की भी व्यवस्था नहीं है, जबकि कई झूले करीब तीस फिट ऊंचाई तक के लगाए गए हैं।
वहीं खाद्य सामग्री की दुकानों पर बड़ी-बड़ी भट्ठियों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन यहां भी अग्निशमन यंत्र नहीं हैं। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इसकी जांच कर रिपोर्ट भेजी है। आपदा विशेषज्ञ ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी के सुपुर्द की है। आपदा विभाग व जिला प्रशासन इस जांच रिपोर्ट को गुप्त रखे है। इसका एक कारण यह माना जा रहा है कि मेला सिर्फ बुधवार तक है, इसलिए इसमें कोई व्यवधान न आए। अगले साल होने वाले उर्स मेले के लिए गाइडलाइन जारी की जा सकती है।
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अग्निशमन विभाग की एनओसी के साथ पीडब्लूडी के जांच प्रमाण पत्र के आधार पर मेले की अनुमति दी गई है। अगर गलत दस्तावेज लगाए हैं तो इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।
चंद्रभूषण प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी सदर।
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आपदा प्रबंधन को वहां हीट वेब का कैंप लगाने के लिए कहा गया था। उन्हें जांच के लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए। आपदा विशेषज्ञ कोई अधिकृत जांच एजेंसी नहीं है।-अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।