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साल में चार बार परीक्षा देंगे विद्यार्थी

Wed, 08 Jul 2015 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बोर्ड परीक्षा की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि विद्यार्थियों में पठन- पाठन के प्रति एवं शिक्षकों में मूल्यांकन के प्रति शिथिलता उत्पन्न हो गई थी। शासन ने कक्षा एक से आठ तक परीक्षा व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें सतत और व्यापक मूल्यांकन पर बल दिया जाएगा। सत्र परीक्षाएं माह अगस्त व दिसंबर में होंगी, जबकि अर्द्घ वार्षिक परीक्षा अक्तूबर में एवं वार्षिक परीक्षा मार्च माह में कराई जाएगी। इस प्रकार शैक्षिक सत्र में छात्र- छात्राओं को कुल चार परीक्षाओं से गुजरना पड़ेगा। कक्षा एक में केवल मौखिक परीक्षा होगी। कक्षा दो, तीन, चार व पांच में लिखित व मौखिक परीक्षा कराई जाएगी। कक्षा छह व आठ में लिखित परीक्षा होगी लेकिन, मौखिक परीक्षा नहीं कराई जाएगी। कक्षा एक से आठ की सभी परीक्षाएं गृह परीक्षा के रूप में आयोजित होंगी। अर्द्ध वार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं की लिखित परीक्षा के लिए मुद्रित प्रश्न पत्र एवं उत्तर पुस्तिकाएं छात्र- छात्राओं को नि:शुल्क दिए जाएंगे, जबकि सत्रीय परीक्षाओं के लिए ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे जाएंगे । प्रत्येक सत्र परीक्षा विषयवार दस-दस अंक की होगी। अर्द्ध वार्षिक परीक्षा प्रत्येक विषय की तीस अंकों की होगी एवं वार्षिक परीक्षा पचास अंकों की होगी। सत्र परीक्षाओं में प्राप्त अंकों एवं अर्द्ध  वार्षिक परीक्षा के अंक को मुख्य परीक्षा के अंकों के साथ जोड़ा जाएगा। एक शैक्षिक सत्र में प्रत्येक विषय का 100 अंकों में मूल्यांकन किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय में परीक्षा व्यवस्था संचालित करने की जिम्मेदारी बीएसए एवं संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी की होगी। परीक्षाफल के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी को रिजल्ट कार्ड दिए जाएंगे, जिसका व्यय सर्व शिक्षा अभियान से किया जाएगा। वार्षिक परीक्षाफल घोषित करने के दिवस को विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। खास बात यह है कि किसी भी छात्र की कक्षोन्नति रोकी नहीं जाएगी।
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