अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर-पाली। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण से पहले वर्ष 1992 में हुई कारसेवा में पाली तहसील के लोगों का भी अहम योगदान रहा है। कारसेवकों का कहना है कि दिसंबर 1992 में कड़े संघर्ष के बाद अयोध्या पहुंचे थे। वर्ष 1994 में परकोटा में भराव के लिए उन्होंने भी तसले से मिट्टी डालकर रामकाज में अपना योगदान दिया था। आज भगवान राम का भव्य मंदिर बनने के साथ ही कारसेवकों का सपना पूरा होने पर खुशी भी हो रही है। पेश है कारसेवकों से बातचीत के अंश...
कारसेवक खेमचंद्र चौरसिया ने बताया कि अयोध्या से वर्ष 1994 में ललितपुर आने के दौरान अमौसी स्टेशन पर सीट को लेकर दूधियों ने उन लोगों पर हमला कर दिया था। इस दौरान तीन कारसेवक घायल हो गए थे, जिन्हें कानपुर आकर अस्पताल में भर्ती कराया था। घटना की जानकारी पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उनका हाल भी लिया था।
भगवान राम का भव्य मंदिर बनने का सपना साकार हो, इसके लिए काफी संघर्ष किया गया। कारसेवा के दौरान पुलिस से बचते हुए अयोध्या पहुंचे और रामकाज में जो संभव हुआ, सहयोग किया। आज रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है, इससे मन खुश है।-मिथिलेश चौरसिया, कारसेवक
वर्ष 1992 में क्षेत्र से करीब 50 कारसेवक अयोध्या गए थे। बाबरी ढांचा ध्वस्त होने पर लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाते हुए जो उम्मीद लगाई थी कि वहां भव्य मंदिर बनेगा, वह आज पूरी हुई है। मंदिर के परकोटा में भराव के लिए तसले से हम लोगों ने भी मिट्टी डाली थी।-खेमचंद्र चौरसिया, कारसेवक
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कारसेवा कर अयोध्या जाने में जो खुशी मिली थी, आज उससे भी ज्यादा इस बात के लिए मन खुश है कि भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण में मैंने भी अपना योगदान दिया है। 22 जनवरी को भले ही वहां नहीं पहुंच सकूंगा, लेकिन मन पूरी तरह से प्रभु राम में लगा रहेगा।-मुकेश राही, कारसेवक
कारसेवा के दौरान पुलिस से बचते हुए किसी तरह अयोध्या तो पहुंच गया, लेकिन मन में संकल्प ले लिया था कि प्रभु राम के काम में जो भी सहयोग करना पड़ेगा, उसे करूंगा। आज भव्य मंदिर बनने से देश के करोड़ों हिंदुओं का सपना साकार हो गया है।-जन्डैल सिंह परमार, कारसेवक