- एथलीट, हैंडबॉल और क्रिकेट से शुरू किया था करिअर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। खेलकूद में अपना करिअर बनाने की तमन्ना ने राखी राजा बुंदेला को कानपुर के रोवर्ड क्लब तक पहुंचा दिया। वहां वह क्रिकेट के अभ्यास के साथ ही सरकारी नौकरी के लिए कोचिंग कर रही हैं। उसका कहना है कि उप्र सीनियर टीम में उसने ट्रायल किया था लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रही है।
शहर की नई बस्ती निवासी राखी राजा बुंदेला के पिता की राजपाल सिंह का निधन वर्ष 2006 में निधन हो गया था। उसका सपना है कि पढ़ने-लिखने के साथ खेल की दुनिया में नाम रोशन करें। उसने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ने के दौरान वर्ष 2010 में एथलीट से अपना खेल करिअर शुरू किया था। उसने एथलीट के साथ क्रिकेट और हैंडबाॅल खेलना शुरू किया। नेहरू महाविद्यालय से स्नातक करने के दौरान हैंडबॉल में वर्ष 2016-17 में कॉलेज की ओर से विश्वविद्यालयी टीम में खेलने का मौका मिला। इसी दौरान योगा में ऑल इंंडिया स्तर पर भाग लेने का मौका विश्वविद्यालय टीम की ओर से मिला। वापस आने पर क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन होने पर खेल शिक्षक ने उसे क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए बाहर जाने की सलाह दी। उसने बताया कि उप्र क्रिकेट एसोसिएशन झांसी से भी एक बार टीम में वह चयनित हो चुकी है लेकिन उप्र सीनियर महिला टीम में ट्रायल में नहीं निकल सकी। क्रिकेट में बॉलिंग और बैटिंग पर अच्छी पकड़ से उसने कई बार अपनी टीम को जिताया। कानपुर जाकर उसने क्रिकेट का अभ्यास क्लब के माध्यम से शुरू किया। इसके साथ उसने कोचिंग भी कर ली। उसने बताया कि वह सरकारी नौकरी के लिए तैयारी भी कर रही है इन दिनों उसने क्रिकेट का अभ्यास बंद कर रखा है आगे मौका मिला तो फिर शुरू कर देंगी। वह राष्ट्रीय स्तर पर महिला क्रिकेट टीम में शामिल होकर देश के लिए खेलना चाहती हैं। वह अपनी प्रेरणा स्त्रोत मां मंजू राजा को मानती है।