संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। छोटी सोच और पांव की मोच जिस तरह से आगे नहीं बढ़ने देती वैसे ही जब तक द्वेष रूपी कालिमा जीवन में रहेगी, जब तक ज्ञान का दीपक नहीं जलेगा। यह आशीष वचन मुनिश्री विनम्रसागर महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि तप और त्याग वह माध्यम बताया जिसके द्वारा जीवन प्रकाशमान और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए होनी। अनहोनी कब घट जाए कहा नहीं जा सकता। तप और त्याग की सीख गुरु के माध्यम से मिलती है जिनके द्वारा क्रोध मान माया लोभ से बचने का उपाय मिलता है और यकीन करिए धार्मिक आचरण से जीवन सुधर जाएगा। विनम्र ज्ञान वर्धिनी प्रतियोगिता में काजल, रजनी जैन, अनीता जैन, अनुष्का, सुरभि, मुन्नी जैन पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। नन्हे मुन्हे बच्चों ने भक्तामर के 12 छंद जाप का फल कंठस्त सुनाकर सभी के मन को आकर्षित किया। इस मौके पर अनिल जैन, कपूरचंद जैन, मनोज जैन, अक्षय अलया, धन्यकुमार जैन एड, प्रेमचंद, अमिताभ जैन, विजय जैन, महेन्द्र जैन, नरेश, प्रदीप, प्रदीप जैन, अंकुर जैन शानू, अनंत सर्राफ, चंचल, अमित जैन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।