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ध्वजारोहण के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ

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मड़ावरा। अष्टानिका महापर्व पर सिद्ध चक्र महामंडल विधान का शुभारंभ मंगलवार को महावीर विद्या विहार में विधान पुण्यार्जक ध्वजारोहण कर किया गया। इस अवसर पर निर्यापक मुनि अभय सागर, प्रभात सागर, निरीह सागर और बाल ब्रह्मचारी मनोज मौजूद रहे।
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अष्टानिका महापर्व पर प्रारंभ किए गए सिद्ध भगवंतों की आराधना के पर्व सिद्ध चक्र महामंडल विधान सुबह बाल ब्रह्मचारी मनोज के निर्देशन में श्री जी की प्रतिमाओं का कार्यक्रम स्थल पर गाजे-बाजे के साथ आगमन हुआ। पांडाल शुद्धि करते हुए घटयात्रा व सकलीकरण की क्रियाएं संपन्न हुई। विधान का आयोजन करवाने वाले पुण्यार्जक विमलेश कुमार, संतोष कुमार, आयुष, आदीश बजाज परिवार ने मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण किया। सभागार में भगवान जिनेंद्र देव की प्रतिमा को रजत पांडुक शिला पर विराजमान कर विश्व में शांति की कामना करते हुए श्रीजी के मस्तक पर शांतिधारा की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य पुण्यार्जक बजाज परिवार सहित डॉ. वीसी जैन, सवाई सिंघई, धीरेंद्र जैन, प्रकाश जैन को प्राप्त हुआ कार्यक्रम में भोपाल से आए गायक भूपेंद्र कुमार की धार्मिक स्वर लहरियों के साथ नित्य नियम पूजन विधान का प्रारंभ किया गया। इस दौरान मंचासीन निर्यापक मुनि अभय सागर, प्रभात सागर, निरीह सागर के मुखारविंद से जिनवाणी हुई। मुनिसंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य बंटी बजाज, राजेंद्र बजाज एवं विक्रम बजाज को प्राप्त हुआ। आयोजकों ने बताया कि आठ नवंबर तक आयोजित विधान के दौरान प्रतिदिन ही रात्रिकालीन कार्यक्रमों में कलाकारों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
ये है सिद्ध चक्र महामंडल विधान का महत्व
सिद्धचक्र महामंडल विधान से दिव्य शक्तियां प्रकट होती हैं। यह विधान सभी विधान का राजा है, इसमें सभी विधान शामिल हैं। यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जो हमारे जीवन के सभी पाप, ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य, चक्र का अर्थ समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है। जिसमें कई प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है। सिद्ध चक्र मंडल विधान सभी सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है, जो हमारे सभी मनोरथों को पूरा करता है। पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने इसी सिद्धचक्र महामंडल विधान के आयोजन से अपने कोढ़ी पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया था।
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