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दस्त से हो जाती सत्रह फीसदी बच्चों की मौत

Sat, 27 Jun 2015 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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जच्चा और बच्चा के जीवन की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2015 -16 मातृ एवं बाल स्वास्थ्य वर्ष के रूप में मना रहा है। दस्त के कारण होने वाली नौनिहालों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा मनाने की योजना तैयार की गई है, जिसके प्रथम चरण में दस्त के दौरान बच्चों की घर में देखभाल के लिए उनकी माताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, दस्त का प्रमुख कारण गैस्ट्रो इंटेस्टीनल इनफेक्शन है, जो बैक्टीरिया, वायरस तथा प्रोटोजोआ से होता है। बच्चों में दस्त का कारण रोटा वायरस तथा ई कोलाई है। स्वस्थ बच्चों की अपेक्षा कुपोषित और खराब वातावरण में रहने वाले बच्चों में गंभीर दस्त तथा निर्जलीकरण की संभावना अधिक रहती है, जो जीवन के लिए खतरनाक है। इस पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां माताओं को निर्जलीकरण की रोकथाम के उपाय सिखाएं जाएंगे। माताओं को इस बात की जानकारी दी जाएगी कि प्रभावित बच्चे में किस तरह के लक्षण दिखाई देते ही उसे इलाज को ले जाना चाहिए और उसे कब घर पर ही अधिक तरल पदार्थ देने की आवश्यकता है। दूसरे चरण में बच्चे की आयु के अनुपात में ओआरएस घोल तैयार करने की विधि सिखाई जाएगी। साथ ही, जिंक का महत्व भी समझाया जाएगा। तीसरे चरण में आवश्यकतानुसार दस्त तथा गंभीर निर्जलीकरण का इलाज किया जाएगा। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिवार कल्याण का यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी की देखरेख में क्रियान्वित किया जाएगा।
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