संवाद न्यूज एजेंसी
बार (ललितपुर)। राजकीय इंटर कॉलेज के कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को पूरा शिक्षा सत्र निकल जाने के बाद भी स्कूल ड्रेस की धनराशि नहीं मिली। ये बच्चे ग्रीष्मावकाश के बाद नए सत्र में भी बिना ड्रेस स्कूल जाने को बाध्य होंगे। अभिभावकों ने खंड विकास अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
कस्बे के जीआईसी में सत्र 2023-24 में कक्षा छह से लेकर आठ तक के 189 बच्चे पंजीकृत हैं। पूरा सत्र बीत जाने पर भी उनमें से किसी बच्चे के खाते में ड्रेस का पैसा नहीं आया। खंड विकास अधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया गया कि अप्रैल से दिसंबर 2023 तक पोर्टल क्रियाशील रहा, लेकिन जिम्मेदारों ने जानबूझकर किसी भी बच्चे का डाटा फीड नहीं किया। इससे शासन से भेजी जाने वाली बारह सौ रुपये की धनराशि से सभी बच्चे वंचित रह गए। अब एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाएगा।
-खाते में सरकार बच्चों के लिए भेजती है पैसा
प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के बच्चों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 1100 रुपये की धनराशि देती थी, लेकिन इस सत्र से 1100 की जगह 1200 रुपये भेजने की घोषणा की गई थी। इस धनराशि से बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म, स्वेटर, जूते-मोजे और स्कूल बैग खरीदने होते हैं। इसके अलावा स्टेशनरी में चार कॉपियां, दो पेंसिल, दो रबर व दो कटर के लिए भी अतिरिक्त पैसे देने की व्यवस्था की गई है।
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मेरा बेटा आठ में पढ़ता है। धनराशि के लिए कागज भी दिए थे, लेकिन साल भर हो गया, धनराशि नहीं मिली। इससे बच्चे की पढ़ाई में खर्चा बढ़ गया। अगर सरकार से मिलने वाली राशि मिलती तो सहूलियत हो जाती।-अजुद्दी ,अभिभावक
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मेरे बच्चे को यूनिफॉर्म और किताबों के लिए धनराशि नहीं मिली है। जबकि, इसके लिए कई बार विद्यालय पहुंचकर जानकारी भी ली, लेकिन सही जवाब नहीं मिला।-पप्पू ,अभिभावक
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मेरी बेटी कक्षा छह में पढ़ती है। घर की स्थिति खराब है। सरकार से मिलने वाली स्कूल की ड्रेस की धनराशि से परिवार पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता था, लेकिन इस बार दिक्कतें पैदा हो गई हैं।-प्रभा, अभिभावक
नोट- वर्जन बाद में भेजा जाएगा।