संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला अस्पताल से लंबे समय से बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहे वरिष्ठ सहायक को निलंबित कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच एडी हेल्थ को सौंप दी गई है।
वरिष्ठ सहायक रविशंकर त्रिपाठी 22 दिसंबर 2023 को एक दिन के अवकाश पर गए थे। इसके बाद वह जिला अस्पताल में कार्य पर वापस नहीं आए। एक माह बीतने के बाद भी वापस न आने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने फोन लगाया, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद पत्र भेजकर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जनवरी 2024 के अंतिम सप्ताह में प्राचार्य ने वरिष्ठ सहायक के मामले में शासन को पत्राचार कर स्थिति से अवगत कराया। निदेशक (प्रशासन) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. राजागणपति आर ने 12 फरवरी को वरिष्ठ सहायक रविशंकर त्रिपाठी को निलंबित कर एडी हेल्थ कार्यालय में संबद्ध कर दिया। साथ ही मामले की जांच अपर निदेशक हेल्थ डॉ. आरके सोनी को करने के आदेश जारी किए हैं।
वरिष्ठ सहायक के अनुपस्थित रहने से ये कार्य हुए प्रभावित
वरिष्ठ सहायक के लगातार अनुपस्थित रहने से अस्पताल के कई कार्य प्रभावित हो गए थे। सभी चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों का वेतन नहीं बन पा रहा था। लगभग दो माह का वेतन रुक गया था। अन्य कार्यों के बिलों का भुगतान भी नहीं हो पा रहा था। अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे थे।
जिला अस्पताल में नहीं हैं लिपिक
जिला अस्पताल में सात लिपिकों के पद स्वीकृत हैं। एक प्रधान लिपिक, वरिष्ठ लिपिक समेत अन्य पांच लिपिक के पद हैं, जिनके अलग-अलग पटलों के कार्य देखने की व्यवस्था है। वेतन सेल, निर्माण कार्य, मरम्मतीकरण, समेत अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग हैं। इसके अलावा एक लिपिक पंजीयन काउंटर के लिए नियुक्त होता है। लेकिन, वर्तमान में अस्पताल में एक भी लिपिक नियुक्त नहीं है। यहां संविदा कर्मियों के सहारे ही कार्य चलाया जा रहा है। ऐसे में समय से कई कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
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ये पद हैं स्वीकृत
पद - स्वीकृत - तैनात - रिक्त
प्रधान लिपिक - 01 - 00 - 00
वरिष्ठ सहायक - 01 - 00 - 00
कनिष्ठ सहायक - 04 - 00 - 00
पंजीयन लिपिक - 01 - 00 - 00
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एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
जिला अस्पताल में लिपिक की कमी के मामले को जिम्मेदार एक दूसरे पर डाल रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने कार्रवाई नहीं की है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डी. नाथ ने बताया कि जिला अस्पताल के मामले में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ही आगे की कार्रवाई तय करेंगे।