शासन ने खेतों में पराली जलाने पर रोक लगाई है, लेकिन इसके बाद भी स्थानीय किसान इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। वह हार्वेस्टर से कटवाई गई गेहूं की फसल के बाद खेतों में खड़े डंठलों को आग लगा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि खेत में कई वैक्टीरिया होते हैं, जो उपज के लिए लाभदायक होते हैं। लेकिन, खेतों में आग लगाने के कारण यह वैक्टीरिया मर जाते हैं। इससे खेतों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी है। पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। इसलिए पराली पर आग लगाने की अनुमति नहीं है, लेकिन किसान नहीं मानते हैं और मनमाने तरीके से खेत में खड़े डंठलों को आग लगाकर जला देते हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से पराली जलाने पर जुर्माना का भी प्रावधान है, लेकिन इससे किसानों को कोई फर्क नहीं पड़ता है।