धर्म व ध्यान से आत्मा होती है पवित्र: मुनिश्री
पाली। श्री दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते मुनिश्री प्रवर सागर महाराज ने कहा कि जीव को ज्ञान के पूर्व सामान्य सत्ता का अवलोकन होता है। जैसी श्रद्धा होती है, वैसा ही ज्ञान होता है। जैसा ज्ञान होता, वैसा पुरुषार्थ होता है, इन्हें जीव को अपने आचरण में उतारना चाहिए। धर्म व ध्यान से आत्मा पवित्र होती है। उन्होंने कहा कि जीव का कल्याण सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चरित्र और तप से होता है। जब तीनों को समान रूप से एकता में पिरोया जाए, तो मोक्ष के भाव तैयार होते हैं। अशुचि भावना में जीव शरीर को पवित्र मानता है, आत्मा को नहीं। बिना धर्म ज्ञान के शरीर का स्वयं अवलोकन करोगे तो स्वयं से घृणा होगी। इसलिए समय का उपयोग करो और पुरुषार्थ करो। पुरुषार्थ अच्छा होगा तो फल भी अच्छा होगा। आत्मा से प्रेम करो, जो पवित्र है। धर्म ध्यान से ही आत्मा पवित्र होती है। पंच इंद्रियों के विषयों में व्यस्त होना नरक के द्वार खोलना है। धर्मात्मा वही है, जो विषम परिस्थितियों में भी धर्म को नहीं छोड़ता। धर्म सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।