झांसी। सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर ग्वालियर से चलकर बरौनी जाने वाली 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल खड़ी थी। झांसी से इसमें सवार होने वाले तकरीबन 200 यात्री व उन्हें छोड़ने आए परिजनों की भीड़ स्टेशन पर जमा थी। एकाएक ग्वालियर से एसी कोच में बैठे कई यात्री गंदे बेडरोल को लेकर शिकायत करने लगे। वह बोल रहे थे कि बेडरोल में मिला चादर-तकिया बदबू मार रहा है। उधर, झांसी के यात्री भी अपनी सीट पर पहुंचे तो उन्हें भी गंदा बेडरोल मिला। ये देख कई यात्रियों ने कर्मचारियों से दूसरा बेडरोल मांगा, लेकिन दूसरा बेडरोल भी गंदा देख यात्री बरस पड़े। यात्रियों ने कहा कि लाखों खर्च करने वाला रेलवे विभाग ट्रेन में इतना गंदा बेडरोल दे रहा है कि उसे ओढ़ना-बिछाना तो दूर, पास रखने में भी बदबू आ रही है। कई यात्रियों की कर्मचारियों से नोकझोंक भी हुई।
दरअसल यह गाड़ी ग्वालियर से शुरू होती है और इसमें बेडरोल भी वहीं से चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में ट्रेन के एसी कोच में सवार यात्री साफ-सुथरे बेडरोल मिलने की उम्मीद लगा रहे थे। लेकिन, जब कर्मचारी ने आकर बेडरोल बांटे तो यात्री मायूस हो गए। उनके हाथों में गंदे-चादर और तकिये थमा दिए गए। चादरों पर तेल और खानपान सामग्री के दाग-धब्बे लगे हुए थे, जबकि तकियों पर मैल जमा हुआ था। तकियों में से बदबू तक आ रही थी। यात्रियों के शिकायत करने पर कर्मचारी दूसरे चादर और तकिये लेेकर आया, लेकिन वह भी वैसे ही थे। इस पर नोकझोंक होने लगी। यहां कर्मचारी ने कहा कि कोई सा भी तकिया, चादर ले लो सभी की स्थिति एक जैसी ही है। ट्रेन में जो बेडरोल चढ़ाए जाते हैं, उन्हीं में से हम आपको दे देते हैं। जब सभी मैले हैं तो साफ चादर, तकिये कहां से लाएं। इस पर ज्यादातर मुसाफिरों ने बेडरोल वापस ही कर दिए..।
एक महीने में दर्ज हुई 82 शिकायतें
झांसी। ट्रेनों में गंदे बेडरोल मिलने की रेल मदद एप पर लगातार शिकायतें आ रही हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले एक माह के भीतर 82 शिकायतें आईं। इसके अलावा टविटर पर भी लोगों ने शिकायतें कीं। इनमें से कई यात्रियों का कहना था कि रेलवे पहले से उपयोग किए जा चुके गंदे (यूज्ड) बेडरोल देकर बीमारियां बांट रहा है। जबकि, कुछ का कहना है कि एक ओर स्टेशनों को नया रूप दिया जा रहा है। नई-नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा रहा है। लेकिन, रेलवे बेडरोल की अपनी पुरानी सुविधा को सही ढंग से नहीं चला पा रहा है।
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बातचीत के सिंगल फोटो
तकिये इतने गंदे हैं कि उन पर सिर रखकर लेटना तो दूर, छूने के बाद हाथ धोने पड़े। तकियों पर मैल की परतें जमा थीं, लग रहा था कि इनकी महीनों से धुलाई नहीं की गई है। - विशाल
चादरों पर तेल व खानपान सामग्री के दाग-धब्बे लगे हुए मिले। गंदे चादर ओढ़ने-बिछाने में घिन आ रही थी। तकिया भी बदबू मार रहा। पूरे कोच में ऐसे ही गंदे बेडरोल दिए गए हैं। - मुकुंद माहौर
सफेद रंग का तकिया काला दिख रहा था। धुलाई भी नहीं की गई। रेलवे यात्री सुविधा के नाम पर औपचारिकता कर रहा है। बेडरोल गंदा मिलने पर वापस कर दिया, जो दूसरा मिला वह भी गंदा है। - रविंद्र कुमार सिंह
रेलवे गंदे बेडरोल देकर बीमारी बांट रहा है। स्वच्छता पर करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन बेडरोल की धुलाई नहीं करवा पा रहा है। गंदे बेडरोल देने से तो बेहतर है कि दिए ही नहीं जाएं। -पर्व श्रीवास्तव
तकिये, चादर गंदे तो हैं हीं और उनमें से बदबू भी आ रही है। सभी यात्रियों के पास ऐसे ही बेडरोल पहुंचे हैं। जबकि, यह ग्वालियर से ही चढ़ाए गए हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि साफ-सुथरे बेडरोल मिलेंगे। - अजीत राय
पहले से पता होता कि ट्रेन में ऐसे बेडरोल मिलेंगे तो घर से ही लेकर आ जाते। तकियों पर मैल जमा हैं। इन्हें देखकर कहा जा सकता है कि महीनों से इनकी धुलाई नहीं की गई है। - ऋषभ यादव
वर्जन
वैसे तो सभी ट्रेनों में साफ बेडरोल चढ़ाए जाते हैं। अगर किसी ट्रेन में गंदे बेडरेाल पाए गए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। यात्रियों को साफ बेडरोल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ