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Lalitpur News: पाली दुष्कर्म कांड में निरुद्ध बंदी ने जेल में फांसी लगाकर दी जान

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ललितपुर। पाली थाने में किशोरी से हुए दुष्कर्म मामले में निरुद्ध विचाराधीन बंदी राजभान पुत्र दयाली ने जिला कारागार में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना को लेकर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए और बंदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पाली थाने में तीन मई 2022 को हुए किशोरी से दुष्कर्म मामले में आरोपी राजभान अहिरवार को पांच मई 2022 को जेल भेजा गया था। आरोपी के खिलाफ न्यायालय में मामला विचाराधीन है। शुक्रवार को सुबह करीब छह बजे जब बंदियों को बैरक से निकालकर जिला कारागार परिसर में प्रार्थना कराई गई। इस दौरान बंदी राजभान अहिरवार प्रार्थना से निकलकर दूसरी मंजिल पर स्थित बैरक नंबर दो की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर चला गया।
उसने वहां सीढ़ियों की रैलिंग के एंगल पर मफलर से फांसी लगाकर जान दे दी। प्रार्थना के बाद जब अन्य बंदी जब बैरक नंबर दो में जाने के लिए सीढ़ियों पर पहुंचे तो राजभान फांसी के फंदे पर लटकता देख चीख-पुकार मच गई। जानकारी पर जेल अधीक्षक और जेलर मौके पर पहुंचे। बंदी की मौत की सूचना पर एसडीएम सदर मोहम्मद अवेश, सीओ सिटी अभय नारायण राय ने पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया और शव को उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जेल प्रशासन का कहना है कि वह जमानत न मिलने से परेशान चल रहा था।
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परिजनों ने लगाया प्रताड़ित करने का आरोप
बंदी राजभान के फांसी लगाने की सूचना पर परिजन भी जेल पहुंच गए। मृतक की मां रामरानी व पत्नी बबीता ने आरोप लगाया कि राजभान को मामले में झूठा फंसाया गया था। जेल में उसके पति को प्रताड़ित किया जाता था और उससे रुपये मांगे जाते थे। पत्नी ने बताया कि पिछले शनिवार को जब वह पति से मिलने गई थी तो उसके पति ने 20 हजार रुपये मांगे थे और कहा था कि जेल में देने पड़ते हैं।
शुक्रवार को सुबह लखनऊ से लौटने पर जानकारी हुई कि जिला कारागार में पाली दुष्कर्म मामले में विचाराधीन बंदी राजभान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह जमानत न मिलने से परेशान चल रहा था। परिजन जो आरोप लगा रहे हैं, वह निराधार हैं। फॉरेंसिक टीम भी आई थी। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने शव को उतरवाया गया।
-लाल रत्नाकर सिंह, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, ललितपुर।
बड़े भाई ने भी की थी आत्महत्या
मृतक राजभान के बड़े भाई जगन्नाथ ने भी दो वर्ष पहले गांव में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जगन्नाथ की पत्नी गौरा ने आरोप लगाते हुए बताया कि उसके पति को भी दुष्कर्म के मामले में झूठा फंसाया गया था। जिस पर वह सात महीने जेल में रहा था। बाद में एक लाख रुपये लेकर राजीनामा किया गया था। फिर भी उसके पति को परेशान किया जा रहा था। जिसके चलते जगन्नाथ ने दो वर्ष पहले फांसी लगाकर जान दे दी थी।
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