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प्रकाश पर्व: कीर्तन से संगत को किया निहाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा साहिब में मंगलवार को गुरु अर्जुनदेव का प्रकाश पर्व श्रद्धा भाव से मनाया गया। सुबह श्री अखंडपाठ साहिब जी की समाप्ति पर मुख्य ग्रंथी युवराज सिंह ने कथा कीर्तन से संगत को निहाल किया।
उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव का जन्म गोइंदवाल साहिब में 15 अप्रैल 1563 को सोढ़ी खत्री परिवार में हुआ और 1579 में इनका विवाह माता गंगा के साथ हुआ था। सिख संस्कृति को घर-घर तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अनेक प्रयत्न किए। इनके एक पुत्र हुआ जिनका नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठवें गुरु बने। वर्ष 1581 में गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवें गुरु बने। उन्होंने ही अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु अर्जुन देव (1581-1606) ने लिखा था और इसमें गुरु नानक और अन्य चार गुरुओं की शिक्षाएं शामिल हैं। इस अवसर पर लंगर की सेवा व छबील (मीठे शरबत) बलदेव सिंह, चरणजीत सिंह परिवार की ओर से हुई।
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गुरु सिंह सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने बताया कि एक से नौ 9 जून तक गुरु अर्जुन देव के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में 40 दिन लगातार सुबह 6:30 बजे से श्री सुखमनी साहिब जी के पाठ होंगे। इसके बाद मुख्य ग्रंथी युवराज सिंह गुरबाणी के कीर्तन करेंगे। 10 जून को गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस गुरुद्वारा साहिब लक्ष्मीपुरा में मनाया जाएगा। इस अवसर पर गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, कोषाध्यक्ष परमजीत सिंह, मंजीत सिंह, जसपाल सिंह, बीके सिंह, हरजीत सिंह, डॉक्टर जेएस बक्शी, गुरप्रीत कौर आदि मौजूद रहे।
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