संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एक सप्ताह से जारी सर्दी के सितम से बसों में सवारियों की संख्या घट गई है। रविवार को कई निजी बसें रूट पर ही नहीं गईं, वहीं रोडवेज बसों में भी 50 सवारियों की जगह महज 10 यात्री ही सफर करते नजर आए। इससे राजस्व पर फर्क पड़ रहा है। हालत यह है कि लक्ष्य के सापेक्ष 25 से 30 फीसदी ही आय हो रही है। निजी बसों के पहिए तक थम गए हैं।
आठ दिनों से भगवान भास्कर नहीं निकले हैं। बारिश के बाद चल रही बर्फीली हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धूप न निकलने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। यही कारण है कि लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। इसका असर यातायात पर भी पड़ा है। निजी बसों में आधी से कम सवारियां बैठीं नजर आ रही हैं। रविवार को झांसी, टीकमगढ़ और चंदेरी जाने वाली बसें सवारियों के अभाव में रूट पर नहीं गईं। झांसी-ललितपुर रूट पर संचालित 42 के सापेक्ष महज 30 बसों का संचालन हुआ। वहीं, रोडवेज की बसों में भी सवारियों की कमी रही। सुबह ललितपुर से झांसी गई रोडवेज बस में केवल 20 सवारियां सफर करती नजर आईं। झांसी की ओर से ललितपुर आई दो बसों में पहली में 10 तो दूसरी बस में 15 यात्री थे। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जहां पहले 50 से 60 फीसदी आय होती थी, अब 25 से 30 फीसदी हो रही है।
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ट्रेन के अनारक्षित कोच में भी कम सफर कर रहे यात्री
सर्दी का असर बसों ही नहीं रेलगाड़ियों की बोगी में भी नजर आ रहा है। अनारक्षित कोच में सवारियों को पहले जहां खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती थी, अब सर्दी ने हालात बदल दिए हैं। रविवार को चेन्नई से चलकर लखनऊ जा रही ट्रेन के जनरल कोच में सीमित यात्री नजर आए।