संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज खेल मैदान पर बनी अयोध्या नगरी में आयोजित श्रीमज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को मुनि विनम्र सागर महाराज, मुनि निस्वार्थ सागर, मुनि निर्मद सागर, मुनि निसर्ग सागर, मुनि श्रमण सागर एवं क्षुल्लक हीरक सागर के सानिध्य और प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी नितिन भैया खुरई एवं सह प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी दीपक भैया टेहरका की मौजूदगी में सामूहिक अभिषेक शांतिधारा के बाद जन्म कल्याणक की क्रियाएं विधि विधान से हुईं।
दोपहर में बालक आदिनाथ के जन्म के उपलक्ष्य में एक जुलूस निकला। ऐरावत हाथी पर सौधर्म इंद्र, हाथी पर धर्मध्वजा लेकर कुबेर इंद्र एवं महायज्ञनायक, रथ पर राजा नाभिराय एवं लगभग एक दर्जन बग्गियों में सवार प्रमुख पात्र चल रहे थे। जुलूस में महिलाएं आकर्षक पोषाक धारण किए डांडिया नृत्य करती चल रही थीं। डीजे की धार्मिक धुनों पर नृत्य करते युवा एवं सत्य अहिंसा के नारे लगाते चल रहे थे। जुलूस अयोध्या नगरी से भ्रमण करते हुए वासुपूज्य जिनालय से पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर से मर्दन सिंह प्रतिमा से रेलवे स्टेशन पहुंचा। जहां पाण्डुकशिला पर जन्माभिषेक संस्कार किया गया। रात्रि में महाआरती, सौधर्म इंद्र का तांडव नृत्य, पालना, बाल क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
उच्च कुलीय कार्य का प्रभाव चेहरे पर तेज के रूप में नजर आता: मुनि विनम्र सागर
मुनि विनम्र सागर ने धर्म सभा में कहा कि भगवान का जन्म उच्च गोत्रीय होता है। उनके शरीर को देख और वचन को सुन सकते हो, लेकिन उनके गुणों के वैभव को नहीं देख सकते। आज कर्म भूमि में व्यक्ति उच्च नीच गोत्र का होता है, जो उच्च गोत्र में जन्म लेकर भी गंदे कर्म करते हैं। आप अपने मन में झांक कर देखें तो हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह पांचों पाप से संलिप्त पाओगे। यदि हम उच्च कुलीय कार्य करें तो उसके प्रभाव का तेज चेहरे पर अवश्य दिखाई देगा। वह किसी सौन्दर्य प्रसाधन का मोहताज नहीं होता। जो कान से सुनता है, वह दिल में उतरता है और उसी से इंसान ऊपर बढ़ता है।
मुनि निस्वार्थ सागर ने कहा कि संसार में जो जीव आया है, वह कल्याण की भावना लेकर आया है। फलों से लदे पेड़ हमेशा झुकते हैं और तना ऊपर को बढ़ता रहता है। ऐसे ही विनम्र व्यक्ति हमेशा ऊपर उठता है। शाश्वत भूमि अयोध्या अनंत काल से पावन पवित्र है। वहां का कण-कण पूज्य है। जहां कल राम की स्थापना हुई, अयोध्या में यहां भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ है। कार्यक्रम की सार्थकता तब है, जब हम इसे देखकर अपना कल्याण करें।
भगवान का जन्म जब होता है तो अनुकूलता, अद्भुत, अलौकिक, अद्वितीय एवं वातावरण मनोहर होता है। सारे बंधन दूर हो जाते हैं। जब कृष्ण का जन्म हुआ था, तब बंदीगृह के ताले स्वत: खुल गए थे और माता देवकी और पिता वासुदेव बंधन मुक्त हो गए थे।
अनामिका अंबर करेंगी कविता पाठ
बुधवार को अयोध्या पुरी में प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका अंबर कविता पाठ करेंगी। वहीं, सुबह तप कल्याणक पर पाणिग्रहण और दीक्षा कल्याणक की क्रियाएं होंगी।