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Lalitpur News: बुंदेली संस्कृति से रूबरू हुए चित्रकला साधक

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। केंद्रीय विद्यालय की प्रधानाचार्या मिनी वर्मा ने कहा कि ललित कलाओं में चित्रकला का स्थान सर्वोच्च है। चित्रकार अपनी भावना और विचारों को अभिव्यक्त कर सकता है और अपने जीवन को सृजनशील व समाज के लिए उपयोगी बना सकता है। वह सिद्धन रोड स्थित कला भवन में निशुल्क कला साधना शिविर के शुभारंभ पर बोल रही थीं।
शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। नेहरू महाविद्यालय में इतिहास विभाग के अध्यक्ष मेजर डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि चित्र के दो मूल उपकरण होते हैं, रंग और रेखा। रेखा से जिस रूप की सृष्टि होती है, रंग उस स्थान की स्पष्टता और संपूर्णता प्रदान करता है। रंग चित्रकला का एक महत्वपूर्ण तत्व है। कलाकार विषय को चित्रित और उसका वर्णन करने के लिए रंग का उपयोग करते हैं। इस शिविर में बुंदेली चित्रकला को स्थान दिया गया है, यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।
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आयोजक ओम प्रकाश बिरथरे ने कहा कि इस शिविर से वंचित एवं साधनहीन कला साधकों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा। साथ ही बुंदेली संस्कृति, तीज त्योहार पर बनाए जाने वाले चित्रों के के अलावा अपनी संस्कृति को जानने का अवसर मिलेगा। शिविर में 45 कलासाधक प्रतिभाग कर रहे हैं। संचालन संस्कार भारती के अध्यक्ष बृजमोहन संज्ञा ने किया। इस मौके पर इंटैक ललितपुर चैप्टर संयोजक संतोष शर्मा, महावीर प्रसाद दीक्षित, महेश प्रसाद बिरथरे, गोविंद नारायण व्यास, प्रीति बिरथरे आदि मौजूद रहे।
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