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Lalitpur News: पांच साल में मात्र डेढ़ प्रतिशत गांव हो सके टीबी मुक्त

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। प्रधानमंत्री ने भले ही वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा हो, लेकिन उनका सपना यहां दम तोड़ता नजर आ रहा है। कुल 415 ग्राम पंचायतों में मात्र सात को ही टीबी मुक्त किया जा सका है, यानि करीब 1.68 प्रतिशत गांवों में ही सफलता मिली है।
मार्च 2018 में प्रधानमंत्री ने 2025 तक टीबी मुक्त देश का लक्ष्य रखा था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार घर-घर क्षय रोग खोजी अभियान चलाने का दावा कर रहा है। टीमें घर-घर क्षय रोगी खोज रही हैं। परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग की जाती है। लक्षण मिलने पर मरीज को नजदीकी इकाई पर जांच को भेजा जाता है। पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाता है।
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लेकिन, क्षय रोगियों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। वर्तमान में विभागीय दस्तावेजों के अनुसार 2000 सक्रिय मरीज हैं। पांच वर्ष में विभाग महज 415 ग्राम पंचायतों में केवल सात को ही क्षय रोग से मुक्त होने का दावा कर रहा है। इस गति से क्षय रोग मुक्ति में कई दशक लग जाएंगे।

ये है क्षय रोगियों की स्थिति
वर्तमान में 2000 क्षय रोगी हैं, जिनका उपचार चल रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह निजी व सरकारी अस्पतालों समेत 250 से 260 मरीज क्षय रोग के आते हैं। सामान्य मरीज छह माह तक दवा खाकर ठीक हो जाते हैं। इसके बाद पुन: लगभग 1750 मरीज नए मिल जाते हैं।
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इन ग्राम पंचायतों के टीबी मुक्त होने का दावा
ब्लॉक - ग्राम पंचायत
तालबेहट - पिपरई, उदगुवां, कंधारीखुर्द
महरौनी - कुरैरा
बिरधा - धोबन खेरी
मड़ावरा - छपरौनी, गोराकछया
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क्षय रोग से मुक्ति के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। मरीजों को चिह्नित कर तत्काल उपचार शुरू कराया जा रहा है। इनका फालोअप भी लिया जा रहा है। डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ
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