झांसी। सुप्रीम कोर्ट के हरी झंडी दिखाते ही नगर निगम चुनाव पर छाये बादल अब साफ होते नजर आ रहे हैं। एक अप्रैल को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होना है। इसी चुनाव से नया ओबीसी फार्मूला लागू होगा। इसके लागू होने से जनवरी महीने में प्रस्तावित पार्षद एवं महापौर पद के आरक्षण निरस्त करके दोबारा नए सिरे से आरक्षण किया जाएगा। इससे महापौर सीट समेत 60 वार्ड का आरक्षण बदलने की पूरी उम्मीद है। निगम सूत्रों का कहना है कि दस अप्रैल तक नया आरक्षण तय कर दिया जाएगा। यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 में ट्रिपल टेस्ट के आधार पर नगर निकाय चुनाव कराने को कहा था लेकिन सरकार ने बिना इसकी परवाह किए वर्ष 2012 एवं 2017 का चुनाव करा लिया। इस दफा भी सरकार पुराने पैटर्न पर चुनाव कराने जा रही थी लेकिन, मामला कोर्ट में जाने से फंस गया। इसके बाद सरकार को अपने पांव पीछे खींचने पड़े। आनन-फानन में सरकार ने पिछड़ा वर्ग समर्पित आयोग बनाया। उसके जरिए सभी जनपदों में सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार कराई गई। निगम अफसरों का कहना है अब ट्रिपल टेस्ट की व्यवस्था नगर निकाय अधिनियम में शामिल कराने की तैयारी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जनवरी माह में नगर विकास विभाग की ओर से जारी आरक्षण शून्य मानकर नए सिरे से आरक्षण तय होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक पिछड़ों की हिस्सेदारी को आधार बनाया जाएगा। दस अप्रैल से पहले नए आरक्षण के होने की उ म्मीद है। इसके जरिए कई सीटों का आरक्षण बदल जाएगा।