ललितपुर। शहर में 12 साल पहले जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर हुई गोलीबारी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला व उनके बेटे समेत सात आरोपियों को दोष मुक्त करार दिया है। पूर्व सपा जिलाध्यक्ष जयराम सिंह यादव ने 22 अगस्त 2007 को कोतवाली ललितपुर में तहरीर देकर बताया था कि वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ भगत राजा के पुत्र व जिला पंचायत की पूराकलां सीट से सदस्य संजय सिंह बुंदेला उर्फ संजू राजा और उनके पुत्र जाखलौन सीट से जिला पंचायत सदस्य जोगेंद्र सिंह यादव अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे।
आरोप था कि 31 अक्तूबर 2005 को पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के चांदमारी स्थित आवास पर जान से मारने की नीयत और दहशत फैलाने के उद्देश्य से तत्कालीन मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला, मंत्री पुत्र पवन राजा बुंदेला, बम्बू सोनी, हन्नू पटेल, सत्येंद्र परमार, मोहम्मद साकिर, वीरु राजा एवं नारायण सिंह ने गोलीबारी की।
इस पर पुलिस ने तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला व दोनों पुत्रों समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने तत्कालीन राज्यमंत्री, उनके पुत्र पवन राजा व वीरु राजा के नाम हटाकर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। न्यायालय में मामले में सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वादी पूर्व सपा जिलाध्यक्ष जयराम यादव, उनकी पत्नी गजेंद्र राजा और अतुल सिंह ने बयान देकर गोलीबारी में पूर्व मंत्री, बेटे पवन राजा और वीरू राजा के शामिल होने की बात कही।
जिस पर न्यायालय ने धारा 319 के तहत पूर्व मंत्री, बेटे पवन राजा और वीरू राजा को 10 मार्च 2017 को न्यायालय में तलब होने के आदेश दिए थे। इस पर पूर्व मंत्री ने हाईकोर्ट की शरण ली। उन्होंने हाईकोर्ट में तलबी के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया था। इसे उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया।
इसके बाद पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा व वीरु राजा 24 जून 2017 को न्यायालय के समक्ष पेश हुए। जहां उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर न्यायालय ने उनको अंतरिम जमानत दे दी। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
अधिवक्ता श्रीबल्लभ करौलिया ने बताया कि मंगलवार को न्यायालय ने मामले में पेश की गईं दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त करार दे दिया। इसमें नारायण सिंह की दौरान मुकद्मा मौत हो चुकी है।