झांसी। बरौनी- ग्वालियर एक्सप्रेस में सफर कर रहे पैसेंजर बुधवार को पूरी रात मच्छरों से लड़ते रहे। अगर किसी तरह चादर ओढ़कर मच्छरों से बचने की कोशिश की भी तो फटी सीटों से कॉकरोच बाहर निकलने लगे। कॉकरोच को देख महिलाएं और बच्चे ऐसे घबराए कि उन्होंने तो सीट बदलवाने के लिए टीटीई से गुहार लगानी शुरू कर दी। यहां ट्रेन में मौजूद स्टाफ से कई बार मच्छरों और कॉकरोच को मारने के लिए कहा गया लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद परेशान यात्रियों ने रेलमंत्री को ट्वीट कर शिकायत की। इसके बाद रेलवे अफसरों ने झांसी में ट्रेन रोककर कोच की सफाई कराई।
बरौनी-ग्वालियर मेल बुधवार शाम को 6.49 बजे बरौनी से ग्वालियर के लिए रवाना हुई थी। ट्रेन जब रात 9.30 बजे मुजफ्फरपुर स्टेशन पहुंची तो ट्रेन के एसी कोच ए-1 में सीट नंबर 30 पर कॉकरोच निकले। यह देख यात्री परेशान हो गए। ट्रेन में कूलिंग भी कम थी, तो मच्छरों ने सताना शुरू कर दिया। यात्री प्रमोद मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कोच में कॉकरोच निकलने की शिकायत कोच अटेंडेंट से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पूरी रात ट्रेन में यात्री मच्छरों से परेशान रहे। कई सीटों पर कॉकरोच निकलने से महिला यात्री डरती रहीं। रातभर कोई भी कोच में सो न सका।
ट्रेन 665 किमी का सफर तय करके सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंची, तो फिर से कोच में कॉकरोच होने की शिकायत की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद यात्रियों में गुस्सा बढ़ गया। लखनऊ से ग्वालियर के लिए यात्रा कर रहे विनय कुमार श्रीवास्तव ने कोच ए-1 में सीट नंबर 41 पर कॉकरोच होने की शिकायत ट्वीट करके रेलमंत्री और रेल मदद एप पर कर दी। उन्होंने बताया कि सीट पर कॉकरोच होने से पूरे सफर में दिक्कत रही। यात्री सीटों पर बैठकर खाना भी न खा सके और न ही आराम कर सके। ट्विटर पर शिकायत होने के बाद रेलवे अफसरों में हड़कंप मच गया। ट्रेन को लखनऊ से 292 किमी चलकर झांसी पहुंचने पर साफ कराया गया।
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चूहे भी मचा चुके उत्पात
ट्रेनों में काॅकरोच और चूहे आए दिन उत्पात मचाते रहते हैं। पिछले दिनों भी खजुराहो-उदयपुर के जनरल कोच में कॉकरोच होने की यात्रियों ने शिकायत की थी। वहीं दिसंबर 2022 में झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस के एसी कोच में चूहों ने तार काट दिए थे। इससे कोच में धुआं भर गया था। इससे पहले अगस्त 2022 में लोकमान्य तिलक टर्मिनस-बलिया एक्सप्रेस के एसी कोच में चूहे उत्पात मचा रहे थे। जिन्हें ललितपुर में ट्रेन रोककर बाहर निकाला गया था। यह आलम तब है जब रेलवे हर साल 10 लाख रुपये चूहे और कॉकरोच मारने पर खर्च कर रहा है।
ट्रेन चलने से पहले पूरी तरह से सफाई कराई जाती है। यात्रियों की शिकायत मिलने पर प्राथमिकता पर निस्तारण कराया जाता है। कॉकरोच और चूहों को रोकने पर लगातार काम किया जा रहा है। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ