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मनुष्य के कर्म प्रभु की इच्छा के अधीन : धनवंतरि दास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। सिद्धपीठ श्रीलक्ष्मी नृसिंह मंदिर में छठवें दिन श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन किया गया।
कथा व्यास धनवंतरि दास महाराज ने कहा कि हमारे जीवन में कभी भी कर्ता भाव नहीं रहना चाहिए। इस संसार में प्रत्येक प्राणी एवं उनके द्वारा किए गए कर्म प्रभु की इच्छा से होते हैं। हम कर्ता भाव मानकर अहंकारी हो जाते हैं। अहंकार पतन का प्रमुख कारण है। संपूर्ण संसार परमात्मा के अधीन है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से जीव का कल्याण होता है। शर्त यह है कि प्रभु चरणों में हमारी पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण होना चाहिए। मनुष्य प्रारब्ध के अधीन है। जीवन में कष्ट व विपरीत परिस्थिति कभी भी आ सकती हैं। प्रेम तो गोपियों जैसा होना चाहिए। उन जैसी प्रभु में निष्ठा कम ही देखने को मिलती है। प्रभु के महान ज्ञानी सखा गोपी प्रेम को तभी समझ पाते हैं, जब वे गोपियों को ज्ञान-उपदेश करने जाते हैं, लेकिन गोपियों के निष्काम प्रेम, समर्पण एवं कृष्ण मिलन की लालसा जानकर नतमस्तक हो जाते हैं। ग्रंथों में ब्रज की बड़ी महिमा बताई गई है। ब्रज रज में, गोपियों में, लाल जी में, श्री किशोरी जी में, समर्पित निष्ठा रखने वाला हृदय ही गोपी भाव का रस जान सकते हैं। इस दौरान महंत गंगादास महाराज, महंत राधेश्याम दास, सीता प्रकाशनारायण, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, सीडीओ केके पांडे, प्रदीप चौबे, सुभाष जायसवाल, सुमन संजय ड्योडिया, भगवत नारायण वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
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