करीब छह माह पहले रबी के सीजन में किसानों की सूखी खड़ी फसलों पर प्रकृति पर प्रकोप पड़ा। फरवरी माह को आज भी जनपद के किसान भूल नहीं पा रहे हैं। इससे जनपद की तीनों तहसीलों में करीब एक लाख से अधिक किसानों को नुकसान हुआ। कई इलाकों में तो गेहूं, चना, मटर, मसूर की फसल 80 प्रतिशत तक नष्ट हो गई। वहीं कई इलाकों में 40 से 60 प्रतिशत तक नुकसान हुआ। पिछले दो सीजन से लगातार फसलें मरने से किसानों से सामने परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई। प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों के माध्यम से सर्वे भी करवाया, इसमें तीनों तहसीलों में 355 करोड़ नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से मिलकर किश्तों में मुआवजा राशि अवमुक्त हुई और इसको बांटने काम किया गया। इसके लिए सीमांत, लघु व वृहद किसानों की सूची बनाई गई। एक हेक्टेयर से कम वाले सीमांत किसान को जमीन के हिसाब से मुआवजा दिया गया। वहीं, लघु को 23 हजार तक मुआवजा बांटा गया। वर्तमान में सीमांत व लघु को मिलाकर कुल 96 करोड़, 70 लाख, 60 हजार रुपए बांट दिए गए हैं। इसमें 309 गांव के 73214 किसानों को राहत राशि पहुंचाई गई है। लेकिन, अभी भी हजारों की संख्या में किसान मुआवजा को भटक रहे हैं। इन किसानों को सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। प्रशासन को अभी भी 258 करोड़ भारी धनराशि की जरूरत है। लेकिन, लंबा समय बीतने के बाद नई किश्त की धनराशि अवमुक्त नहीं हुई है।