कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में मधुमक्खी पालन पर प्रशिक्षण देते डा. नितिन यादव।
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ललितपुर। बांदा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डॉ. नितिन यादव ने देश में पाई जाने वाली मधुमक्खी की किस्में, मधुमक्खी की संरचना, मौन गृह के सदस्य, मौन गृह के सदस्य का श्रम विभाजन, मधुमक्खी की पहचान, शहद, शाही जैली की औषधीय उपयोगिता आदि के बारे में बताया। कहा कि इससे प्रशिक्षण ले रहे लोग आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसमें विभिन्न गांवों के 30 लोग प्रशिक्षण ले रहे हैं। डॉ. यादव ने बताया कि मधुमक्खी पालन में परागण के माध्यम से फसलों की उपज में बढ़ोत्तरी होगी। मधुमक्खी पालन से फसलों में परागण के साथ-साथ शहद, मोम, प्रोपेलिस, मधुमक्खी का विष, शाही जैली आदि का उत्पादन होता है। मधुमक्खी पालन को किसान, युवा, कृषक, यहां तक कि महिला भी कर सकती हैं और कम लागत में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। आगे के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौन गृह का रखरखाव, मधुमक्खी पालन हेतु उपकरण, मौन गृहों का मौसमीय प्रबंधन, शहद निष्कासन, मौन विष का निष्कासन, मधुमक्खी के कीटों एवं प्राकृतिक शत्रुओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश तिवारी, डॉ. मारूफ अहमद डॉ. अर्चना दीक्षित एवं केंद्र के कर्मचारी मौजूद रहे।