बांसी (ललितपुर)। कस्बा के लालजी मंदिर में शिव महापुराण कथा एवं 31 लाख पार्थिव शिवलिंग व सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र का जाप चल रहा है।
सोमवार को कथा व्यास शिव शंकर शास्त्री ने भगवान शंकर और सती के चरित्र का वर्णन किया। कहा कि सती का शरीर अपने पिता के यज्ञ में समाप्त होने के बाद भगवान शंकर योगेश्वर योगी का रूप धारण कर तपस्या में लीन हो गए। वह हजारों वर्ष तक तप करते रहे और भगवान शंकर हमेशा के लिए योगेश्वर बन गए, पर मां सती ने हिमालय के यहां अवतार लेकर भगवान शंकर को अपना पति बनाने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की। इसी समय धरती पर दैत्य का अधर्म और अत्याचार बढ़ जाने के कारण देवताओं ने भगवान शंकर से विवाह की प्रार्थना की, तब जाकर भगवान शंकर ने भूमि का भार टालने के लिए पार्वती के साथ विवाह रचाया। गणेश जैसे संस्कारी पुत्र को जन्म देकर माता-पिता का आदर करना हमारे समाज को सिखाया कि पुत्र के लिए सभी तीर्थों से बढ़कर माता-पिता की सेवा होती है। पार्थिव शिवलिंग निर्माण के मुख्य यजमान अशोक साहू, शीला साहू, बल्लू पटवा राजकुमारी पटवा, विकेंद्र यादव, नीलम यादव, आशीष यादव, वर्षा यादव, गुल्ले साहू आदि मौजूद रहे।