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लॉकडाउन में कुष्ठ रोगी नहीं आए इलाज कराने

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लॉकडाउन के दौरान कुष्ठ रोगियों को उपचार नहीं मिल सका है। रोगियों ने उपचार कराने में रुचि नहीं दिखाई, इस कारण उपचार कराने भी नहीं आए। महीने में औसत 70 से 75 मरीज उपचार को आते थे, लेकिन पिछले तीन महीने में बीस से पच्चीस कभी दस से पंद्रह मरीज आए हैं। लॉकडाउन के कारण मरीजों ने उपचार की ओर भी ध्यान नहीं दिया और यही वजह है कि नियमित उपचार लेने के लिए नहीं आए। जबकि, कुष्ठ रोगियों को नियमित उपचार की जरूरत होती है। सरकार इसके लिए रोगियों को पांच सौ रुपये महीना भी देती है।
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