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Lalitpur News: बहुचर्चित अनूप सहाय हत्याकांड में तीन को आजीवन कारावास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार पाराशर ने बुधवार को छह साल पूर्व घर के दरवाजे पर गोली मारकर ठेकेदार अनूप सहाय की हत्या करने के मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश दुबे ने बताया कि दो फरवरी 2018 की रात दस बजे कोतवाली अंतर्गत मोहल्ला बड़ापुरा के रहने वाले ठेकेदार अनूप सहाय घर पर खाना खाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान तीन लोगों ने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया। जैसे ही अनूप ने दरवाजा खोला, दो बदमाशों ने पिस्टल से ताबड़तोड़ फायर कर अनूप के सिर और पेट में गोलियां मार दी। अनूप बुरी तरह जख्मी होकर जमीन पर गिर पड़े। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गोली मारकर दोनों हत्यारे गली के बाहर खड़े अपने तीसरे साथी के साथ बाइक से फरार हो गए। पुलिस ने भाई की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
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पुलिस ने झांसी के सीपरी बाजार थाना अंतर्गत लहरगिर्द निवासी मेघराज सिंह ठाकुर, गोंदू कंपाउंड निवासी अरविंद श्रीवास, झांसी कोतवाली क्षेत्र के दतिया गेट निवासी पीयूष ठाकुर और नईबस्ती निवासी दिलीप कुशवाहा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अरविंद रिश्ते में मृतक अनूप सहाय का सगा बहनोई था। पुलिस ने 12 अगस्त 2018 को इन सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने 28 अगस्त को इसे स्वीकार कर मुकदमे की सुनवाई प्रारंभ की। साक्ष्यों, गवाहों एवं अभियोजन पक्ष पैरवी के चलते जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों पर दोष सिद्ध होने पर मेघराज सिंह, पीयूष ठाकुर व दिलीप कुशवाहा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अरविंद की जून 2021 में कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। मेघराज को आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष का कारावास व पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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बहनोई ने रची थी हत्या की साजिश
झांसी के गोंदू कंपाउंड में रहने वाला अरविंद श्रीवास झांसी के एक कोर्ट में क्लर्क था। उसका पत्नी वंदना से अक्सर विवाद होता रहता था। इसकी शिकायत जब वंदना ने अपने भाई ठेकेदार अनूप सहाय से की तो उसने अरविंद के साथ गाली-गलौज कर दी और चार गोलियां सिर में उतार देने की धमकी दी थी। अरविंद ने पेशे से अधिवक्ता और शातिर अपराधी मेघराज से संपर्क किया। मेघराज पर कई मुकदमे दर्ज हैं। इस बीच अदालत की तारीखें कराने में अरविंद, मेघराज की मदद करता था। कचहरी आने-जाने के दौरान अरविंद की मेघराज से दोस्ती हो गई। दोनों ने मिलकर अनूप को मौत के घाट उतारने की साजिश रची। इसके लिए पहले रकम लंबी मांगी गई थी, लेकिन किसी तरह अरविंद ने दो लाख में सुपारी तय कर ली। एडवांस में दस हजार रुपये देकर बकाया रकम काम के बाद देना तय हुआ। घटना में मेघराज ने दतिया गेट निवासी पीयूष की भी मदद ली थी।
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सजा दिलाने में डीजीसी की रही अहम भूमिका: इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय में कोतवाली पैरोकार अनूप श्रीवास ने सभी साक्ष्य व तथ्य समय पर प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर शासकीय अधिवक्ता ने अपने तर्कों से मुकदमे को मजबूत किया। इसके चलते दोषियों को आजीवन कारावास हो सका।
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