अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रमजान के पाक मौके पर झांसी कारागार के दर्जनों बंदियों ने भी रोजा रखा है। रोजा रखने वाले बंदियों की खातिर आधी रात को सहरी का इंतजाम किया जाता है। शाम को कैदी इफ्तार करते हैं। जेल अफसरों का कहना है कि जेल मैनुअल के मुताबिक इन बंदियों को सहरी आदि उपलब्ध कराई जाती है।
झांसी जेल में बंद 65 बंदी इन दिनों रमजान के मौके पर रोजा रखे हुए हैं। किसी न किसी अपराध में जेल के भीतर आने के बाद अब यह बंदी भी पाक माह में रोजा रखकर इबादत करने में जुटे हैं। यह बंदी रोजा रखने की कई पाबंदियां भी मानते हैं। भोर में उठकर सहरी खाने के बाद दिन भर का रोजा रखते हैं। इसके बाद शाम को इफ्तार होता है। जेल अफसरों के मुताबिक एक निर्धारित राशि के भीतर कैदियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। उसी राशि के भीतर रोजा रखने वाले कैदियों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। रोजा रखने वाले कैदियों की सहरी आधी रात में बनती है। उसके बाद तयशुदा समय पर रोजेदारों को उपलब्ध कराई जाती है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल के मुताबिक जेल के अंदर सभी बंदियों के लिए एक समान नियम है। निर्धारित बजट में उपवास सामग्री देने का नियम है। हिंदू अथवा मुस्लिम कैदी उपवास करता है तो उसी बजट के मुताबिक खाद्य सामग्री दी जाती है।
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340 कैदियों की खातिर रोजाना बनता है फलाहार
झांसी जेल के भीतर का माहौल इन दिनों देवी मय है। जेल के अंदर 340 बंदी देवी उपासना में डूबे हैं। इनमें से कई बंदी रोजाना दुर्गा स्त्रोत का पाठ करते हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि कई गंभीर मामलों में सजा काट रहे अपराधी भी देवी उपासना करते हैं। सुबह-शाम बंदी अपनी-अपनी बैरक में देवी उपासना करते नजर आते हैं। उपवास करने वालों में विचाराधीन बंदियों की संख्या सर्वाधिक है। उपवास करने वालों को रोजाना 750 ग्राम आलू दिया जाता है।