पाली। नगर में श्री नीलकंठेश्वर आदर्श रामलीला मंडल के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में दशरथ मरण व भरत मिलाप की लीला का मंचन हुआ।
रामलीला में जब सुबह अयोध्या के मंत्री सुमंत व अन्य लोगों की नींद खुली तो राम, लक्ष्मण व सीता कहीं नजर नहीं आए। तब मंत्री सुमंत नगरवासियों संग दुखी मन से अयोध्या लौट आए। अयोध्या आकर सुमंत ने महाराज दशरथ को सारा हाल सुनाया। दशरथ को जब कहीं राम नजर नहीं आए तो वह हाय राम करते हुए जमीन पर गिर पड़े और वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। राजा की मृत्यु का समाचार सुनते ही नगर में कोहराम मच गया।
ननिहाल से लौटकर भरत और शत्रुघ्न ने जब सारा हाल सुना तो वह बहुत दुखी हुए। भरत ने मां कैकयी को बहुत बुरा भला कहा। कौशल्या ने भरत को समझाया, कैकेयी ने अपनी गलती स्वीकार की। भरत स्वयं भाई राम को वापस अयोध्या लाने का निर्णय लेकर मंत्री सुमंत, मुनि वशिष्ठ व सेना लेकर चित्रकूट पहुंचे। राजा और सेना को देख भीलों ने सोचा कि यह सब राम पर आक्रमण करने आ रहे हैं, तो उन्होंने मोर्चा ले लिया। भीलों के राजा के पूछने पर भरत ने सारी बात बताई तब मामला शांत हुआ। भरत के अनुनय करने के बाद भी जब राम अयोध्या जाने को राजी नहीं हुए। तो वह भगवान राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आए। रामलीला के शुभारंभ पर आरती कमलेश कुमार चौरसिया व मुकेश कुमार राही ने की। इस अवसर पर रामलीला मंडल अध्यक्ष सूर्यांश सिंह बुंदेला, राजदीप सिंह बुंदेला, देवेंद्र चौरसिया, घनश्याम चौरसिया, जगदीश, श्यामलाल चौरसिया, सुनील नामदेव, मुरारी चौरसिया, मोहन लाल चौरसिया, गणेश चौरसिया, राहुल यादव, कमलेश चौरसिया, सुशांत जैन, महेंद्र जैन, डब्बू जैन, पीर अली शाह, जयकुमार जैन, भाईलाल जैन आदि मौजूद रहे।