जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीज भर्ती होने से दोबारा रौनक लौट आई है। वर्तमान में 14 मरीज पुरुष वार्ड में भर्ती है, जिनका इलाज किया जा रहा है। पिछले दिनों कोराना संक्रमित मरीज की मौत हो जाने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीज भाग गए थे, जिससे सन्नाटा पसर गया था। जिला अस्पताल में काउंसलर पद पर कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मी की पिछले दिनों तबीयत खराब हो गई थी, जिसे अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भर्ती किया गया था, जहां पर उसका दो दिन तक उपचार चला। इस दौरान श्वांस लेने के दिक्कत के कारण कोरोना सैंपल लिया गया था। इस दौरान अस्पताल के कई कर्मचारी भी स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए उसके पास पहुंचे थे और मरीज स्वयं भी स्टाफ से मिलता रहा। हालत में सुधार नहीं होने पर सात मई की रात्रि में झांसी के लिए रेफर कर दिया गया। महारानी लक्ष्मीबाई मेडीकल कॉलेज झांसी में उसे कोविड वार्ड में भर्ती किया गया। जहां पर इलाज के दौरान आठ मई उसकी मौत हो गई। मौत के अगले दिन नौ मई को उसकी जांच रिर्पोट में कोरोना पॉजीटिव की पुष्टि हुई। जैसे ही मृत व्यक्ति की जांच रिर्पोट में कोरोना की पुष्टि हुई तो यह सूचना आग की तरह फैल गई। जिला अस्पताल में खबर पहुंचते ही अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीज एक-एक करके उपचार पूरा कराए बिना ही भाग गए थे। इससे अस्पताल सूना हो गया था। आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं थीं और आइसोलेशन वार्ड में भी ताले पड़ गए थे। तब से अस्पताल में मरीजों को भर्ती की सेवाएं पूरी तरह से बंद चल रहीं थी। अस्पताल प्रबंधन से अस्पताल को सेनेटाइज कराया। मृतक व्यक्ति के परिजनों और संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों की रिर्पोट निगेटिव आ गई, तो सभी ने राहत की सांस ली। अस्पताल में चार दिन बाद भर्ती की सेवा शुरू हो गई। अब वहां पर 14 मरीज भर्ती हैं और उपचार करा रहे हैं। ----------- जिला अस्पताल को सेनेटाइज कराया गया। अस्पताल में अब मरीजों को भर्ती की सुविधा शुरु हो गई है। बृहस्पतिवार को 14 मरीजों को पुरुष वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरु किया गया है। - डा. एसके वासवानी मुख्य चिकित्सा अधिकारी