तालबेहट-बानपुर। मुनि विनंद सागर महाराज ने कहा कि उत्तम त्याग धर्म के बारे में कहा कि त्याग के माध्यम से जीवन की उन्नति और विकास होता है। उधर,बानपुर स्थित दिगंबर जैन नया मंदिर में उत्तम त्याग धर्म पर चर्चा करते हुए ममता दीदी ने कहा कि त्याग ही जीवन को सफल बनाता है। उन्होंने कहा कि दान देना ही जगत में श्रेष्ठ है क्योंकि धर्म का स्तंभ ज्ञान ही है जहां ज्ञान दान होगा वहां धर्म रहेगा।
उन्होंने कहा कि रोग के नाश करने वाली रासिक औषधि का दान करना चाहिए। औषधि दान बड़ी ही उपकारक है अत: औषधी दान अवश्य देना चाहिए। आहार दान समस्त दानों में प्रधान हैं प्राणी का जीवन शक्ति बल बुद्धि में सभी गुण आहार बिना नष्ट हो जाती हैं जिसने आहार दान दिया उसने प्राणियों को जीवन शक्ति बल बुद्धि सभी कुछ दिया। अत: भक्तजनों यदि अपना हित चाहते हो तो दुखी जीवो को दान करो। सम्यक दर्शन ज्ञान आदि गुणों के धारकों का महा विनय पूर्वक सम्मान करो। उधर, तालबेहट में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विनंद सागर महाराज ने कहा कि बिना किसी अपेक्षा के दिया गया दान किया गया त्याग हमें महान बनाता है। इस मौके पर श्री जी का अभिषेक किया गया। धर्मसभा में मुनि विनुत सागर महाराज के अलावा चतुर्मास कमेटी के अध्यक्ष रितेश जैन,प्रिंस ,कोषाध्यक्ष अजय जैन,मंत्री अरुण जैन मोदी,,सुधीर जैन, सजल मोदी आदि मौजूद रहे।
श्रीजी का अभिषेक करते हुए श्रावक एवं धर्मसभा को करते हुए मुनिश्री
त्याग मानव को बनाता है महान- मुनि निरीह सागर
ऽपाश्चात्य सभ्यता छोड़ोऽ पर आधारित नाटिका का हुआ मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
मडावरा। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रमण मुनि निरीह सागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म के संबंध में कहा कि त्याग के माध्यम से जीवन की उन्नति और विकास होता है। जब तक पर का संबंध लगा रहता है तब तक हम धर्म को ग्रहण नहीं कर सकते। जैसे-जैसे पर वस्तु का त्याग करते जाते हैं, वैसे वैसे जीवन की उन्नति होती चली जाती हैं। त्याग में सुख है, राग में दु:ख है। इसलिए हमें त्याग धर्म को सुनकर कुछ न कुछ त्याग करने का विचार करना चाहिए। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि छोड़ने का नाम त्याग है।
धर्मनगरी वर्णीनगर में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर नगर में विराजमान निर्यापक मुनि अभय सागर,मुनि प्रभात सागर, मुनि निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा,संगीतमयी पूजन श्रद्धालुओं ने किया। मोक्ष शास्त्र का वाचन प्रियांशी जैन, सुप्रिया जैन,सलोनी जैन, प्रतीक जैन ने किया। श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रो. रमेश चंद्र जैन, डॉ. अभिषेक जैन, वैदिक जैन, कमलेश बजाज, दिवाकर बजाज परिवार को प्राप्त हुआ। श्रावक श्रेष्ठी बनने का सौभाग्य महेंद्र जैन,मोनू जैन पठा के लिए प्राप्त हुआ। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र के आठवें अध्याय की अर्थ सहित व्याख्या परम पूज्य श्रमण मुनिश्री अभय सागर महाराज ने की। रात्रिकालीन बेला में संस्कृति सराफ के निर्देशन में ऽपाश्चात्य सभ्यताऽ का प्रभाव नाटिका का मंचन किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई द्वारा किया गया।