अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा कि संकल्प विकल्प की परिणति का त्याग ही आकिंचन धर्म है। जैन मुनि पर्यूषण पर्व पर अभिनंदनोदय तीर्थ में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनिश्री ने कहा कि जो त्याग की प्रवृत्ति रखता है, वह हमेशा शांति का अनुभव करता है। ऐसे लोग स्वयं तो आदर्शपूर्ण जीवन जीते ही हैं, दूसरों को भी आदर्शवान बनने की दिशा देते हैं। ज्ञानीजन विषय राग कषायों से डरते हैं और अज्ञानीजन राग का आवरण बनते हुए त्याग से डरते हैं। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन गल्ला मंडी पूर्व अध्यक्ष जय कुमार, मनीष जैन, ऋतिक जैन, मनीष जैन, कैलाश जैन, राजकुमार जैन, आनंद जैन द्वारा किया गया। तत्वार्थ सूत्र का वाचन वर्षा जैन, धैर्या जैन, हिताशी, अभिनव जैन एवं अर्घ्य पुष्पा देवी, सौरभ जैन परिवार ने किया। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया।
अटा मंदिर में धर्मसभा में पंकज जैन शास्त्री ने कहा कि लालची व्यक्ति कभी भी शांति का अनुभव नहीं कर पाता। वह तो मात्र भ्रम में ही जीता है। दूसरी ओर जो परिग्रह नहीं रखता, वह हमेशा शांति का अनुभव करता है। पार्श्वनाथ जैन नया मंदिर में पूर्णमति महिला मंडल द्वारा खुला प्रश्नमंत्र का आयोजन हुआ, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया गया।
आदिनाथ मंदिर नई बस्ती में अनुज शास्त्री के सानिध्य में धर्म प्रभावना के साथ शांतिविधान संपन्न हुआ, जिसमें जैन पंचायत के मंत्री कैप्टन राजकुमार जैन, प्रबंधक मोदी, शुभेंदु जैन, जितेंद्र जैन, नीलेंद्र जैन, सत्येंद्र जैन, लोकेश जैन, मनोज जैन आदि मौजूद रहे। शाम को पाठशाला परिवार द्वारा श्रेष्ठ जोड़ी प्रतियोगिता एवं बेटी बेटों से कम नहीं का मंचन किया गया।
इधर, नईबस्ती आदिनाथ मंदिर चंद्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर में धर्म की अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है।
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1008 दीपों से बडे़ बाबा की महाआरती
सायंकाल जैन बड़ा मंदिर में भगवान आदिनाथ बडे़बाबा के सम्मुख 1008 दीपों से महाआरती एवं आरती सजाओ प्रतियोगिता प्रबंधक आनंद जैन, अजित जैन के संयोजन में हुई। एम्ब्रोशिया कॉलोनी जैन मंदिर में प्रबंधक वीणा जैन के संयोजन में भौतिकता की चकाचौंध में मंदिर का परिवेश पर नाटिका का मंचन हुआ। रीना, अंशी डिंपल, आरती सुनीता जैन का योगदान रहा। आदिनाथ मंदिर सिविल लाइन में ब्रह्मचारणी सीमा, नीता एवं श्रद्धा द्वारा दस धर्मों की शृंखला में प्रवचन हुए। इसके बाद 48 दीपों से आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई।
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संस्कारी बहू नाटिका का मंचन
विद्या सुधा बालिका मंडल के तत्वावधान में अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र पर संस्कारी बहू नाटिका का मंचन ब्रह्मचारिणी सविता, नीलू के निर्देशन में हुआ। बताया गया कि संस्कारों से विहीन परिवार अधार्मिक होते हैं। जिस परिवार में धार्मिक संस्कार होते हैं, उस परिवार के बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी संस्कारवान होते हैं। जिस घर में संस्कारी बहू होती है, वह परिवार संस्कारवान ही होता है। नाटिका में प्रमुख भूमिका प्रियांशी जैन एवं विद्या सुधा बालिका मंडल की बहनों की रही।
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परिग्रह का त्याग जरूरी : मुनि अक्षय सागर
मड़ावरा। धर्म नगरी वर्णीनगर में उत्तम आकिंचन दिवस पर धर्मसभा में मुनि अक्षय सागर महाराज ने कहा कि आकिंचन धर्म आत्मा की उस दशा का नाम है, जहां बाहरी सभी को छूट मिलती है, आंतरिक संकल्प की आवश्यकता को भी विश्राम मिल जाता है।
मुनिश्री ने कहा कि बाहरी परित्याग के बाद भी मन में ''मैं'' और ''मेरे पन'' का भाव निरंतर रहता है, जिससे आत्मा पिरोती है और मुक्ति की ऊर्ध्वगामी यात्रा नहीं कर पाती। परिग्रह का त्याग कर परिणामों का आत्म दर्शन करना ही आकिंचन धर्म की धारा है। परिग्रह के प्रति राग का भाव जब छूट जाता है, तब उत्तम आकिंचन धर्म प्रगट होता है। स्वाध्याय का नियम लेने वाली पाठशाला की बालिकाओं ने मुनिसंघ को शास्त्र भेंट किया। समवशरण महामंडल विधान में सौधर्म इंद्र बनने एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य पन्ना लाल, नीरज जैन बजाज परिवार को प्राप्त हुआ। कुवेर इंद्र बनने का सौभाग्य अजित कुमार, अंकुर जैन परिवार, पं. संतोष शास्त्री, संभव जैन, दीपक सेठी के परिवार को प्राप्त हुआ।
समोशरण में चारों दिशाओं में इंद्र बनने का सौभाग्य राकेश जैन, राजेंद्र जैन दद्दी, अशोक कपासिया, विजय जैन को प्राप्त हुआ। रात्रि में आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने शिक्षाप्रद नाटिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन संघस्थ ब्रह्मचारी भैया राजेश जैन ने किया।
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वास्तविक स्वभाव में रमण करना ही उत्तम आकिंचन धर्म
तालबेहट। पर्यूषण महापर्व के नौवें दिन आकिंचन धर्म मनाया गया। दोनों जैन मंदिरों में भक्ति भाव के साथ सुबह नित्यमय अभिषेक हुआ। विश्व शांति की मंगल कामना के साथ मंत्रोच्चार के मध्य शांतिधारा, पूजन विधान का आयोजन किया गया। संतोष कुमार ने धर्मसभा में कहा कि संसार को क्षणभंगुर मानकर आत्मा के वास्तविक स्वभाव में रमण करना ही उत्तम आकिंचन धर्म है। इसमें सभी प्रकार के बाह्य और अंतरंग परिग्रह का त्याग कर ब्रह्मचर्य का मार्ग प्रशस्त किया जाता है। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत गरवा एवं डांडिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। छोटे बच्चों ने वृद्धाश्रम एवं संस्कारों पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए।
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पवागिरी में हुआ धार्मिक आयोजन
पवा-कड़ेसराकलां। सोमवार को उत्तम आकिंचन धर्म को जीवन में धारण करने का आह्वान किया गया। इससे पूर्व मंदिर में अभिषेक, शांति धारा एवं मंगल आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। समिति अध्यक्ष ज्ञान चंद्र, राजकूमार, आनंद कुमार, जयकुमार, अक्षत, रूपेश, सरल आदि का सक्रिय योगदान रहा।
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18 को होगा क्षमावाणी पर्व : पवागिरी क्षेत्र प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष विशाल पवा ने बताया कि मंगलवार 17 सितंबर को पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा और 18 सितंबर को सिद्ध क्षेत्र पवागिरी में क्षमावाणी कार्यक्रम एवं वार्षिक कलशाभिषेक होगा।