जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की पहल पर लागू की जा रही यह योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वर्तमान में अधिवक्ताओं के ड्रेस को ही पहचान मानकर उन्हें प्रवेश मिल जाता था। लेकिन लखनऊ हाईकोर्ट के बाद न्यायालय प्रशासन व जिला बार एसोसिएशन ने पहचानपत्र अनिवार्य कर दिए। इन आई कार्डों की डुप्लीकेसी रोकने के लिए बार कोड युक्त पहचानपत्र बनाने की योजना बनाई जा रही है।
लखनऊ हाईकोर्ट में हुए हादसे बाद अब जनपद न्यायालय व जिला बार एसोसिएशन सुरक्षा को लेकर सजग हो गया है। न्यायालय में प्रवेश के दौरान अधिवक्ता की पोशाक को आधार नहीं माना जाएगा। इसके लिए न्यायालय ने जारी किए पहचानपत्रों के द्वारा ही न्यायालय में प्रवेश की कार्ययोजना बनाई गयी है।
वर्तमान में तो साधारण पहचानपत्र अधिवक्ताओं के लिए जारी किए गए हैं। लेकिन आगामी समय में इन पहचानपत्रों को आधुनिक बनाने व डुप्लीकेसी रोकने के लिए बार कोड लगाने पर पहल चल रही है।
इस संबंध में जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने न्यायालय प्रशासन से वार्ता भी की है। जल्द की यह पहचानपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ होने के आसार नजर आ रहे हैं। बार कोड के स्कैन करते ही अधिवक्ता का पूरा ब्योरा पंजीयन सहित आ जाएगा।
न्यायालय परिसर में पंजीकृत अधिवक्ता ही ड्रेस पहनकर करेंगे प्रवेश
वर्तमान में गैर पंजीकृत अधिवक्ता भी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं की ड्रेस पहनकर प्रवेश कर लेते थे। इससे रोकने के लिए भी जिला बार एसोसिएशन पहल कर रहा है। हालही में हुई बैठक में गैर पंजीकृत अधिवक्ताओं पर लगाम कसने के लिए उनके ड्रेस पहनने पर राेक लगाने का निर्णय लिया गया है।
जल्द की बार कोड युक्त पहचानपत्र जारी करने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में न्यायालय प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता हो चुकी है।
बृजेंद्र सिंह यादव, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन।