अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। उच्च शिक्षण संस्थानों व स्टेडियम के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइनें काल साबित हो रही हैं। इन लाइनों के नीचे न तो गार्डिंग है न सपोर्टिंग। इन संस्थानों के प्रबंधक व प्राचार्यों ने विभागीय अधिकारियों को पत्र लिख लाइन शिफ्ट कराने को कहा, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ ने भी लाइन शिफ्टिंग के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह रहा कि दो दिन पहले शनिवार को रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में एचटी लाइन टूट कर गिरने से बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र दिव्यांश के पिता रमेश चंद्र की मौत हो गई। इससे पहले भी एक हादसे में एक छात्र बुरी तरह झुलस गया था और उसे अपना एक हाथ गंवाना पड़ा। पेश है शिक्षण संस्थानों का आंखों देखा हाल।
आरएमवी में एचटी लाइन में न गार्डिंग न सपोर्टिंग
रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय से हाईटेंशन लाइन निकली है। इस लाइन में न तो गार्डिंग न सपोर्टिंग लगी है। तारों के टकराने से चिंगारी गिरती है। लाइन शिफ्टिंग को लेकर प्राचार्य ने कई बार अधिकारियों को पत्र भेजा, लेकिन नतीजा सिफर रहा। हैरत की बात तो यह कि शनिवार की घटना के बाद विभाग ने कर्मियों को भेजकर तार तो जुड़वा दिया, लेकिन कोई अधिकारी जांच करने नहीं पहुंचा।
स्टेडियम में लटक रही लाइन
स्टेडियम परिसर से निकली हाईटेंशन लाइन के तार भी बगैर गार्डिंग व सपोर्टिंग के हैं। एक-दो बार दो तार टूट गए थे, जिन्हें जोड़ दिया गया था। इन्हीं तारों के पास से खिलाड़ी दौड़ लगाते हैं। तेज हवा में ये तार आपस में टकरा जाते है, इससे चिंगारी छूटती है। यदि इस लाइन की शिफ्टिंग न हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय में तारों के टकराने से निकलती है चिंगारी
स्टेडियम से पहले स्थित श्री दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय में करीब दो हजार विद्यार्थी व इससे लगे एसडीपीएस स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। इस महाविद्यालय परिसर से एचटी लाइन के साथ ही खंभे भी लगे हैं। अक्सर तारों के टकराने से निकली चिंगारी से पेड़ों में आग लग जाती है। विभाग ने पेड़ों को तो कटवा दिया, लेकिन लाइन शिफ्ट कराना मुनासिब नहीं समझा। करीब दो साल पहले तारों की चपेट में आकर एक हादसा भी हो चुका है।
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शिवनगर में झुलस गया था व्यक्ति
हाईवे स्थित शिवनगर कॉलोनी में हाईटेंशन लाइन हालत में है। कुछ स्थानों पर तो तार जुड़े हुए हैं। इनके टूटकर गिरने से बीते वर्ष एक व्यक्ति झुलस गया था। तार भी कई बार गिर चुके हैं। गलियों में भी तार कई स्थानों पर नीचे आ गए हैं। ऐसे में कोई भी दिन दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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घर के पास से निकली एचटी लाइन की चपेट में आने से पूरा शरीर झुलस गया था। हाथ में तार चिपकने से पूरी तरह खराब हो गया तो डॉक्टर ने आपरेशन कर हाथ काट दिया। आज भी पेट पर जले के निशान हैं और कान का पर्दा खराब होने से जिंदगी ही खराब हो गई।-राजा
हाईटेंशन लाइन हटवाने के लिए विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ से भी बात की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। -कमलेश चौधरी, प्रबंधक श्रीदीप चंद्र चौधरी महाविद्यालय
तेज हवा में एचटी लाइन के तारों के टकराने से चिंगारी गिरती है। एक बार तो पेड़ों में आग भी लग गई थी। तारों का कॉलेज कैंपस व स्टेडियम से हटाना बेहद जरूरी है।- शैलेंद्र सिंह, छात्र
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कॉलेज कैंपस में लगे खंभे व एचटी लाइन से हर समय खतरा बना रहता है। विद्युत विभाग के अधिकारियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए अन्यथा किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।-अभिषेक योगी
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कॉलेज कैंपस से एचटी लाइन हटवाने के लिए कई बार विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया, लेकिन एसडीओ आकर निरीक्षण कर लेते और बाद में कुछ नहीं होता। बीते दिन हुए हादसे से सबक लेकर जल्द लाइन शिफ्ट कराना चाहिए।-केशव देव, प्राचार्य रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय
स्टेडियम के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कराने के लिए अभियंता को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। झूलते तारों से स्टेडियम में कभी भी हादसा हो सकता है। -रेखा रावत, जिला क्रीड़ा अधिकारी, स्टेडियम
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डिग्री कॉलेजों के ऊपर से निकली एचटी लाइन को शिफ्ट कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। यदि वह इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई कराएंगे। -मनोहर लाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री
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रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में हुई घटना की जांच के लिए एडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। डिग्री कॉलेजों व स्टेडियम से निकली लाइनों के संबंध में बिजली विभाग के एमडी को पत्र लिखा जाएगा।-अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी
एचटी लाइन शिफ्ट करने के लिए विभाग सर्वे कराकर स्टीमेट तैयार करता है, लेकिन धनराशि संबंधित संस्था को जमा करनी होगी, इसके बाद ही लाइन शिफ्ट हो सकती है। सपोर्टिंग व गार्डिंग जिन लाइनों पर नहीं है, वहां लगवाई जाएगी।-संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, विद्युत विभाग