गुटखा पर प्रतिबंध लग जाने से इसकी कालाबाजारी हो रही है। तीन से चार गुने महंगे दामों पर गुटखा बिकने के कारण लोगों ने इससे तौबा कर ली है। अब आदत के कारण कोई सौंप तो कोई इलायची और कोई चुइंगम खा रहा है और पैसे बचा रहा है। दरअसल, गुटखा की ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। दस रुपये वाला गुटखा तीस से पैंतीस रुपये में बिक रहा है। वह भी आसानी से नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में जो लोग फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और कुछ न कुछ खाने के तलबगार हैं, उन्होंने गुटखा की जगह सौंफ या चुइंगम खाना शुरू कर दिया है। इससे न केवल पैसे की बचत हो रही है, बल्कि गुटखा भी नहीं खा रहे हैं।