अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कलक्ट्रेट और घंटाघर सहित अन्य सरकारी भवन रंगबिरंगी लाइटों से जगमगा गए। वहीं सात किलों को सजा कर शुक्रवार को ध्वजारोहण किया जाएगा। स्कूली बच्चों की रैली और ध्वजारोहण के कार्यक्रम को लेकर देर शाम तक तैयारियां होती रहीं।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट के मुख्य गेट से लेकर अन्य दफ्तरों को फूलों व झालरों से सजाया गया। जिला अस्पताल, नगर पालिका परिषद, घंटाघर, एसपी ऑफिस, पार्क सहित प्रमुख चौराहों पर रंग-बिरंगी झालरें देर शाम से जगमगा उठीं। इधर, सातों किलों में पूरे दिन साफ सफाई होती रही। देर शाम यहां झालरें लगाने का काम शुरू हो गया था। एडीएम अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सभी किलों पर ध्वजारोहण किया जाएगा। सीडीओ केके पांडेय ने सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं।
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कलक्ट्रेट में 8.30 बजे और स्कूलों में 10 बजे होगा ध्वजारोहण
शुक्रवार सुबह आठ बजे से कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे। सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण, प्रभातफेरी, डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा, महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी अवंतीबाई, परमानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण होगा। सभी सरकारी कार्यालयों में सुबह 8.30 बजे ध्वजारोहण, राष्ट्रगान व संविधान में उल्लेखित संकल्प का स्मरण, पुलिस लाइन में परेड, 10 बजे शिक्षण संस्थाओं में झंडा फहराया जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, वृद्धाश्रम, राजकीय संप्रेक्षणगृह, राजकीय किशोर गृह दैलवारा में फल वितरण, स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताएं, जिला कारागार में फल वितरण, शाम को निर्धन बस्तियों में कंबल वितरण किया जाएगा।
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रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में हुई सघन चेकिंग
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जीआरपी और आरपीएफ ने रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने मेटल डिटेक्टर से यात्रियों का सामना चेक किया। जीआरपी इंस्पेक्टर नवीन कुमार ने बताया कि अभी तक सब कुछ सामान्य रहा।
-ये है प्रमुख किलों का इतिहास
तालबेहट का किला 1857 में जो स्वतंत्रता संग्राम हुआ था, उसका गवाह है। यहां ऊंची पहाड़ी के ऊपर विशाल सरोवर के किनारे 1618 ईसवी में राजा भारतशाह ने इस किले का निर्माण कराया था, उन्हीं के नाम से इसे भारतगढ़ दुर्ग के नाम से जाना जाता है। किले का मुख्य द्वार काफी भव्य है, इस पर सुंदर नक्काशी उत्कीर्ण है। किले के परिसर में मंदिर, मस्जिद व मजार भी बने हैं। किले के दो प्रमुख द्वार हैं, इनमें हाथी दरवाजा मुख्य है। किले के अंदर मुख्य सभास्थल, विशेष तहखाने, विशाल बावड़ी, राजा रानी निवास, तालाब तक जाने का किले के अंदर से ही मार्ग बना हुआ है।
1857 की क्रांति में राजा मर्दनसिंह की अहम भूमिका रही है। बालाबेहट में गोंड किले का पुनर्निर्माण कर मराठा सेनापति गंगाधर ने बनवाया था। किला जीर्णशीर्ण अवस्था में है। यहां भग्नावेशों में बुर्ज, परकोटा, रानी महल, हाथी दरवाजा एवं किले के पीछे कलात्मक बावड़ी है। तालबेहट के राजा मर्दनसिंह ने बानपुर किले का निर्माण कराया था। इसकी दीवारों पर नक्काशी देखने योग्य है। किले में दीवान ए आम, दीवान ए खास, सभास्थल, स्नानागार, रानी महल, परकोटा, सैनिकों और सुरक्षा सामग्री के लिए कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा सौरई किला भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इन सभी किलों को भव्यता से सजाया जाएगा।
सभी ऐतिहासिक इमारतों को सजाया जाएगा। किलों की प्रमुखता से सजावट कर यहां ध्वजारोहण होगा। साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।-अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।